जिंदगी केवल कलेक्शन नहीं कनेक्‍शन है : स्वामी चिदानंद सरस्वती

– परिवार को बचाना है तो संस्कार ही है सन्मार्ग
– देवी स्वस्‍थ तो देश स्वस्‍थ का दिया मंत्र
– महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी
– नदी की तरह हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए
कोलकाताः देश के जाने माने संत तथा ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के प्रमुख स्वामी चिदानंद सरस्वती के साथ ही साध्वी भगवती सरस्वती शनिवार को कोलकाता पधारे हैं। स्वामी चिदानन्द सरस्वती एक हिन्दू आध्यात्मिक गुरू एवं सन्त हैं। वे मुनि की रेती स्थित ‘परमार्थ निकेतन आश्रम’ के संस्थापक अध्यक्ष हैं। वे भारतीय संस्कृति शोध प्रतिष्ठान, ऋषिकेश तथा पिट्सबर्ग के हिन्दू-जैन मन्दिर के भी संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं। स्वामी चिदानंद सरस्वती को 1987 में शुरू होने वाले हिंदू धर्म के 11-खंड विश्वकोष के लिए आधार तैयार करने का लिए श्रेय दिया जाता है।​ उन्होंने जिंदगी से जुड़े कई अहम पहलुओं पर सन्मार्ग से खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश :
क्या आज की पीढ़ी अध्यात्म को समझती है?
– हां, निश्चित रूप से आज की पीढ़ी अध्यात्म को समझती है। उन्हें अगर उनकी भाषा में उनके स्तर पर बताया जाये ताे वे भी अध्यात्म को फॉलो करेंगे। उन्हें सही तरीके से बताने वाला कोई चाहिये क्योंकि युवा पीढ़ी को भी शांति की उतनी ही जरूरत है जितना एक बुजुर्ग को।
 तकनीकी दुनिया में युवा पीढ़ी किस हद तक अध्यात्म से जुड़ती है?
जीवन में तकनीकी स्तर पर सब आगे बढ़ रहे हैं, धन-वैभव काफी है लेकिन भीतर से वे कहीं ना कहीं खुश नहीं हैं। लेकिन जब आदमी खुश नहीं रहता तो उसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है शांति की, लेकिन जब दिन के अंत में इंसान के पास शांति ही नहीं है तो उसके द्वारा अर्जित भौतिकवादी सुख का कोई मतलब नहीं रह जाता है। अगर आपके पास शांति नहीं है तो आप दूसरों को भी शांति के बजाय अपना क्रोध देंगे और इसका ये मतलब हुआ कि आप भीतर से कनेक्टेड नहीं हैं। जिंदगी केवल कलेक्शन नहीं है बल्कि कनेक्‍शन है।
युवा पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहेंगे?
युवाओं को उन्होंने सफलता के तीन मूलमंत्र बताए जिसके अनुसार ध्यान जितना जरूरी है, सोच समझ कर प्रतिक्रिया देना भी उनके लिए आवश्यक है। इंट्रोस्पेक्‍शन को ध्यान में रखकर कार्य करना उन्हें सफलता की कुंजी प्रदान करने में सहायक होगा, क्योंकि उसी के माध्यम से हम अपने जीवन के बैलेंस शीट को सही से देख पायेंगे।
गंगा सफाई अभियान से जुड़े हैं, इसको आप किस रूप में देखते हैं?
आज के दौर में हम क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग का अटैक देख रहे हैं। तापमान बढ़ता चला जा रहा है, आगे और बढ़ेगा इसके नियंत्रण के लिये हमें पौधरोपण करना चाहिये क्योंकि पौधे लगेंगे तो पानी होगा, पानी होगा तो नदियां होंगी, नदियां होंगी तो गंगा आरती होगी, कुंभ होगा, पीने का जल होगा, जीवन होगा, इसलिये पानी को बचाना बहुत जरूरी है।
नारी सशक्तीकरण पर विचार
स्वामीजी ने नारी को लेकर कहा कि जरूरी है कि महिलायें स्वस्‍थ रहें तभी तो देश स्वस्‍थ होगा। महिलाओं को शादी से पहले शिक्षा जरूरी है।
अभिभावकों को दिया संदेश
स्वामीजी ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को सही संस्कार देना जरूरी है। कार के साथ संस्कार की जरूरत है। पैरंट्स अपने बच्चों को सन्मार्ग पर ले आयें, अपने मूल्यों से जोड़ें।अगर परिवार को बचाना है तो संस्कार ही है सन्मार्ग। सन्मार्ग के रास्ते पर चलते रहें।

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