लालू की जमानत याचिका खारिज, सीबीआई ने किया था विरोध

रांची : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को चारा घोटाले से जुड़े दुमका कोषागार से धन के गबन के मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी की। सीबीआई अदालत द्वारा दी गयी सजा की आधी अवधि भी अभी तक लालू ने न्यायिक हिरासत में पूरी नहीं की है। इसी के आधार पर उनकी जमानत याचिका खारिज की गयी है। इससे पहले तीन तारीखों में उनकी याचिका पर सुनवाई टल गई थी।

जमानत याचिका में दिया बीमारी का हवाला

दरअसल बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर लालू यादव ने जमानत मांगी थी। जमानत याचिका में उन्होंने बीमारी का हवाला देते हुए कहा था कि वो रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं और कई बीमारियों से पीड़ित हैं। पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है।

तीन करोड़ 13 लाख रुपए के घोटाले का है आरोप

इस मामले में सीबीआई की विशेष न्यायालय ने लालू यादव को पिछले वर्ष 24 मार्च को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत सात-सात वर्ष की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उनपर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसके अलावा चारा घोटाले के तीन अन्य मामलों में भी वो सजायाफ्ता हैं। लालू यादव पर यह आरोप है कि उन्होंने दुमका कोषागार से तीन करोड़ 13 लाख रुपए गबन किए हैं।

पहले नहीं हो सकी थी सुनवाई

उल्लेखनीय है कि पिछली दो तारीखों से उच्च न्यायालय में द्वितीय पारी में शोक सभा के चलते इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी थी। लालू यादव की जमानत याचिका पर पहले 22 नवंबर को और फिर 29 नवंबर को सुनवाई तय की गयी थी लेकिन उच्च न्यायालय के अधिवक्ता के निधन के चलते द्वितीय पारी में न्यायालय में शोक सभा हुई जिस कारण लालू की जमानत याचिका पर सुनवाई को टाल दिया गया।

सजा की आधी अवधि भी पूरी नहीं हुई

सीबीआई ने लालू को भ्रष्टाचार के इस मामले में जमानत दिये जाने का सख्त विरोध करते हुए पहले ही अपना जवाब न्यायालय के समक्ष दाखिल कर दिया है। सीबीआई ने कहा था कि दुमका कोषागार मामले में जमानत दाखिल करने वाले लालू ने मात्र 22 महीने ही जेल में बिताएं हैं। ऐसे में सजा की आधी अवधि भी पूरी नहीं हुई है जबकि उच्चतम न्यायालय द्वारा भी इस मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है। जहां तक उनके स्वास्थ्य की बात है तो रिम्स के चिकित्सक लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। 15 बीमारियां होने के बाद भी फिलहाल उनकी जान को कोई खतरा नहीं है। इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जाए।

रिम्स अस्पताल में इलाज करा रहे हैं लालू

बता दें कि झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह ने मामले में आठ नवंबर को लालू के वकीलों की दलील सुनी थी जिसमें मुख्य रूप से उन्होंने लालू की उम्र एवं उनके स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्हें जमानत दिये जाने का अनुरोध किया था। शुक्रवार को सीबीआई की दलील मानते हुए उच्च न्यायालय ने लालू की जमानत याचिका खारिज कर दी। फिलहाल लालू बिरसा मुंडा कारागार के माध्यम से रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं और इलाज करा रहे हैं।

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