स्वदेशी फाइटर जेट तेजस ने पहली बार रात में अरेस्टेड लैंडिंग की, परीक्षण सफल

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नई दिल्ली : स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस ने रात में अरेस्टेड लैंडिंग का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मंगलवार को इसका परीक्षण किया। नौसेना में शामिल किए जाने की दिशा में यह बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। तेजस के सफल परीक्षण के बाद डीआरडीओ ने ट्वीट कर कहा, “नेवी वेरिएंट के एलसीए तेजस का गो‌वा में आईएनएस हंसा के तटीय टेस्ट फैसिलिटी में पहली बार 12 नवम्बर को रात के समय अरेस्टेड लैंडिंग कराया गया। इससे अरेस्टेड लैंडिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ेगा। रक्षामंत्री ने डीआरडीओ, भारतीय नौसेना और एचएएल को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।”

किसी भी विमान के लिए ‘अरेस्ट लैंडिंग’ पास करना जरूरी

इस लड़ाकू विमान ने परीक्षण केंद्र में उतरते वक्त झटके से रुकने के लिए अपने फ्यूसलेज से बंधे हुक की मदद से एक तार को पकड़ा। किसी भी विमान के लिए विमानवाहक पोत पर उतरने की खातिर बेहद कम दूरी में पूरी तरह रुक जाने में सक्षम होना काफी अहम होता है। इसी क्रिया को ‘अरेस्ट लैंडिंग’ कहा जाता है। जिसे तेजस ने सफलतापूर्वक पास कर लिया है। गोवा में समुद्रतट पर स्थित परीक्षण केंद्र में शुक्रवार को किया गया परीक्षण उन्हीं परिस्थितियों में किया गया, जो किसी विमानवाहक पोत पर रहती हैं, और जहां विमानों को उतरने के लिए डेक पर बंधे तार को पकड़ना पड़ता है।

अब तक इन देशों के पास ही ऐसे विमानों की सुविधा थी

अब तक कुछ ही लड़ाकू विमान ‘अरेस्ट लैंडिंग’ का कारनामा कर पाते हैं, जिन्हें अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और हाल ही में चीन ने विकसित किया है। गोवा में समुद्रतट पर बनी परीक्षण केंद्र में इस परीक्षण का बार-बार सफल होना ही साबित करेगा कि एलसीए-एन सबसे अहम डिजाइन फीचर-किसी भी विमानवाहक पोत के डेक पर ‘अरेस्टेड लैंडिंग’ के जबाव को यह विमान झेल सकता है। जब समुद्रतट पर होने वाले ये परीक्षण सफल हो जाएंगे, तभी एलसीए-एन के प्रोटोटाइप के विकास कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे नौसेना पायलट अगला कदम उठा पाएंगे-यानी भारत के एकमात्र ऑपरेशनल विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य पर वास्तव में इसे लैंड कराया जाएगा।

जाने क्या है अरेस्टेड लैंडिंग

नौसेना में शामिल किए जाने विमानों के लिए दो चीजें सबसे जरूरी होती हैं। इनमें एक है उनका हल्कापन और दूसरा अरेस्टेड लैंडिंग। कई मौकों पर नेवी के विमानों को युद्धपोत पर लैंड करना होता है। चूंकि, युद्धपोत एक निश्चित भार ही उठा सकता है, इसलिए विमानों का हल्का होना जरूरी है। इसके अलावा आमतौर पर युद्धपोत पर बने रनवे की लंबाई निश्चित होती है। ऐसे में फाइटर प्लेन्स को लैंडिंग के दौरान रफ्तार कम करते हुए, छोटे रनवे में जल्दी रुकना पड़ता है। यहां पर फाइटर प्लेन्स को रोकने में अरेस्टेड लैंडिंग काम आती है।

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