भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा वाष्पीकरण मापने का ज्यादा प्रभावी और कम खर्चीला तरीका

 

बेंगलुरु : भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के वैज्ञानिकों के एक दल ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो उनके मुताबिक एक स्थानीय क्षेत्र में वाष्पीकरण की दर का पता कुछ मिनटों में ही लगा सकता है। बेंगुलुरु स्थित संस्थान ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘वाष्पीकरण का पता लगाने के लिए यह उपकरण मौजूदा तरीकों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावी और कम खर्चीला है।’’ आईआईएससी के यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जयवंत एच अराकेरी ने बताया कि उनके इस तरीके से पौधों में वाष्पोत्सर्जन और मिट्टी से वाष्पीकरण का पता ज्यादा बेहतर तरीके से लगाया जा सकता है। जर्नल ऑफ हाइड्रोलॉजी में हाल में प्रकाशित इस अध्ययन के वह वरिष्ठ लेखक हैं।
पौधों में जल की कमी को नियंत्रित करता है वाष्पीकरण
वाष्पीकरण वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा पानी तरल से गैसीय अवस्था में बदल जाता है। जल चक्र का अहम हिस्सा होने के साथ ही साथ वाष्पीकरण पौधों में जल की कमी को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इस प्रक्रिया को वाष्पोत्सजर्न (ट्रांसपाइरेशन) कहा जाता है। वाष्पीकरण दर को मापना किसानों के लिए भी बेहद उपयोगी है, क्योंकि इससे उन्हें अपने खेतों में पानी की जरूरतों का पता लगता है। लेखकों का कहना है कि उनके इस उपकरण के जरिए समुद्र में वाष्पीकरण के तरीके में बदलाव का भी अध्ययन किया जा सकता है। उनका कहना है कि अगला कदम इस उपकरण को बाजार के हिसाब से उपलब्ध कराना है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

नंदीग्राम में ममता की सभा में लाखों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद

सन्मार्ग संवाददाता खड़गपुर/नंदीग्राम : नये वर्ष के दूसरे सप्ताह से ही तृणमूल सुप्रीमों और राज्य की मुख्यमंत्री जिलों के दौरे पर निकल रहीं हैं और उसकी आगे पढ़ें »

सांसद पड़े नरम, पहुंचे हावड़ा में आयोजित तृणमूल की रैली में

सौगत ने सांसद प्रसून को किया फोन अरूप राय के नेतृत्व में निकाली गयी रैली में प्रसून व भाष्कर भट्टाचार्य राजीव, लक्ष्मीरतन व वैशाली नहीं हुए शामिल हावड़ा आगे पढ़ें »

ऊपर