जीवन में हो कष्ट तो बुधवार को करें श्री गणेश चालीसा का पाठ, पूरी होगी मनोकामना

कोलकाता : हिंदू धर्म में भगवान गणेश का विशेष महत्त्व है l किसी भी पूजा या मांगलिक कार्यों को करने के लिए सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करते हैं l उसके बाद ही अन्य देवी-देवताओं का पूजन करते हैं l भगवान श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है l गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने वे अपने भक्तों से बेहद प्रसन्न होते हैं l ऐसी मान्यता है कि इसके साथ ही अगर गणेश भगवान के मंत्रों का जाप करके उनकी आरती और चालीसा का पाठ किया जाए तो गणेश जी का आशीर्वाद दोगुना हो जाता है l यह भी मान्यता है कि बुधवार के दिन भगवान गणेश जी की आरती और चालीसा का पाठ किया जाए तो गणेश भगवान अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं l

गणेश चालीसा

दोहा

जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥

चौपाई

जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥

जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥

 

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजित मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट सिर नयन विशाला॥

 

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥

 

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विधाता॥

ऋद्धिसिद्धि तव चँवर डुलावे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

 

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगल कारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

 

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा।

अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥

 

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥

 

गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥

 

बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥

सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥

 

शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं। सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आए शनि राजा॥

 

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥

गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥

 

कहन लगे शनि मन सकुचाई। का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास उमा कर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहऊ॥

गणेश चालीसा में भगवान गणेश के जन्म और उनकी शौर्य गाथा का वर्णन है l इनकी महिमा की गाथा गाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं l

 

 

 

शेयर करें

मुख्य समाचार

जानें राज्य में कब से चलेंगी बसें

बस मालिकों की सक्रियता बढ़ी, पर किराया वृद्धि की मांग पर अड़े सरकार के निर्देश का इंतजार सरकारी बस के कर्मियों को बुलाया परिवहन विभाग ने सन्मार्ग संवाददाता कोलकाताः आगे पढ़ें »

वैक्सीनेशन की डोज लेने की लग रही होड़

18 से अधिक उम्र के लिए अब भी जद्दोजहद बरकरार सन्मार्ग संवाददाता कोलकाताः राज्य में वैक्सीनेशन के प्रति लोगों का उत्साह चरम पर है। हालांकि 18 साल आगे पढ़ें »

ऊपर