उच्च रक्तचाप लक्षण, उपचार और बचाव

उच्च रक्तचाप एक ऐसी बीमारी है, जिसमें रक्त का दबाव सामान्य से अधिक होता है। रक्तचाप में परिवर्तन एवं वृद्धि उम्र के साथ होती है, अथवा जीवन शैली का प्रभाव भी इस पर होता है। रक्त के दाब में उतार चढ़ाव साधारणत: हमारे स्वास्थ्य को खतरा प्रस्तुत नहीं करते परन्तु निरन्तर उच्च दबाव के कारण गंभीर परिणाम हो सकते हैं जैसे पक्षाघात, दिल का दौरा, हृदय स्पन्द का रुकना और गुर्दे/वृक्क को क्षति होना। रक्तचाप, रक्त द्वारा धमनियों पर पड़ने वाले दाब का माप है।
गुर्दे/वृक्क के रोग (गुर्दे की धमनियों का संकीर्ण होना) अन्त: स्राव ग्रन्थियों के रोग एड्रीनल ग्लैंड/अधिवृक्क ग्रन्थि की बीमारियां, जिसके कारण रक्तचाप पर असर पड़ता है और एथोरोस्केलरोसिस/ धमनीकलाकाठिन्य धमनियों का संकीर्ण होना जिसे हम धमनियों का कड़ा होना कहते हैं, ऐसे रोग हैं जिनके कारण उच्च रक्तचाप हो सकता है।
उच्च रक्तचाप का असर
मस्तिष्क पर असर:- उक्त रक्त चाप पक्षाघात का एक मुख्य कारण है।
धमनियों के फटने से (एन्यूरिज्म रक्त वाहिनों) में दोष अथवा उनकी दीवारों में कमजोरी के कारण थैलीनुमा विस्फारित होना) मस्तिष्क में रक्तस्राव हो जाता है।
हृदय पर असर:- उच्च रक्तचाप के हृदय पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हृदयशूल (एन्जाइना) एवं दिल के दौरे का खतरा रक्त प्रवाह में बाधा पडऩे के कारण अधिक होता है।
नेत्रों पर असर:- उक्त रक्तचाप से नेत्रों की नाजुक रक्त वाहिनियों को क्षति हो सकती है।
गुर्दे पर असर:- उच्च रक्तचाप के कारण गुर्दे के रोग हो सकते हैं या फिर वह उच्च रक्तचाप का कारण भी हो सकते हैं।
धमनियों पर असर:- धमनियों में बाधा उत्पन्न होने के कारण रक्त में धनास्त्र (क्लाट) बन सकते हैं। ये क्लाट टूट कर शरीर के किसी भी अन्य भाग में जा कर वहां की धमनियों में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं जिससे हो धमनियों की दीवारें कमजोर हो जाती है। वे गुब्बारे की तरह फूलती हैं और उनके फटने से रक्तस्राव होता है।
लक्षण

रक्तचाप में मध्यम वृद्धि से दर्शनीय लक्ष्मण नजर नहीं आते। रक्तचाप में तीव्र वृद्धि के कारण सरदर्द, हृदय स्पन्दन का तीव्र होना, हृदय की धड़कनों का अनुभव और अस्वस्थता या थकान जैसे लक्षणों का अनुभव होता है। उच्च रक्तचाप कभी-कभी किसी पूर्व मौजूद रोग के कारण हो सकता है। सेकेन्ड्री उच्च रक्तचाप किसी भी निश्चित कारण के न होने पर भी होता है।
रक्तचाप में वृद्धि किसी भी समय हो सकती है और सामान्य रूप से तब तक अज्ञात रहती है जब तक आम चिकित्सा परीक्षण के समय या किसी अन्य रोग के कारण डॉक्टरी सलाह लेते समय सामने आती है। इसी कारणवश उच्च रक्तचाप को एक सुप्त घातक रोग कहा जाता है।
वजन में कमी के साथ आहार में बदलाव एवं धूम्रपान को रोकने से रक्तचाप और उसके कारण होने वाले दूसरे रोगों में कमी हो सकती है। इसके अलावा दवाइयों में कमी या उनसे संपूर्ण तरह से बचा जा सकता है।
रक्तचाप में तीव्र वृद्धि को चिकित्सा के लिये एंटीहाइपरटेन्सिव उच्च रक्तचाप को रोकथाम करने वाली औषधियों के प्रयोग के साथ खतरा कम करने वाले कदमों को भी उठाना आवश्यक है।
उपचार

रक्तचाप पर हृदय के रक्त पंप वाली शक्ति, रक्त वाहिनियों को चौड़ाई और उसमे बहने वाले रक्त की मात्र का प्रभाव पड़ता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने वाली हर किस्म की औषधि का दाब कम करने का तरीका अलग होता है। उच्च रक्तचाप को कम करने वाली औषधि, उच्च रक्तचाप को पूरी तरह से दूर नहीं कर सकती अपितु रक्तचाप को कम कर बीमारी को नियंत्रित कर सकती है।
उच्च रक्तचाप को कम करने वाली औषधि का चयन व्यक्तिगत जरूरत को देखकर किया जाता है। कभी-कभी एक ही किस्म की औषधि से मनचाहा असर हो जाता है, परन्तु अन्य रोगियों में एक अधिक औषधियों की आवश्यकता होती है।
इलाज करने से सिरदर्द एवं दिल की धड़कनों में तेजी से आराम मिलता है पर अधिकतर लोगों में कोई भी लक्षण न होने से रक्तचाप में सुधार स्पष्ट नहीं होता पर फिर भी यह ज़रूरी है कि औषधि निरंतर ली जाती रहे।
जब रक्तचाप सामान्य हो जाये, तब धीरे-धीरे औषधि की मात्र में कमी की जा सकती है।
बचाव

नियमित रक्तचाप का ऑकन महत्त्वपूर्ण है जिससे इसका निदान शीघ्र हो सकता है और इससे उत्पन्न होने वाले अन्य रोग जैसे हृदय के रोग और पक्षाघात से बचा जा सकता है।
– जिन व्यक्तियों को अज्ञात हेतुक रक्तचाप है उन्हें अपना वजन कम करना यदि वह अधिक है, धूम्रपान का त्याग करना, आहार में नमक की मात्र में कमी, नियमित व्यायाम, तनावमुक्ति और एक संतुलित कम वसा और रेशे के आहार का सेवन करना चाहिये।
– उच्च रक्तचाप को कम करने वाली औषधि आम तौर पर रक्तचाप को नियंत्रण में रखती है। रक्तचाप को अपने घर पर स्वयं नापने से फायदा होता है पर आम तौर पर एक दवाखाने में जा कर नियमित रूप से दाब का आंकन करने से उपचार के प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
– नियमित व्यायाम से शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है और वजऩ कम करने से रक्तचाप में कमी आती है। यह उन लोगों को खासकर उपयोगी होता है जिनका वजऩ सामान्य से अधिक होता है।
– अपने आहार में वसा की मात्र में कमी, मदिरा में कमी, नमक की कमी करने और अधिक रेशे के सेवन से भी लाभ होता है। धूम्रपान का पूर्ण त्याग करना चाहिये।

 

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