सेहत के लिए कितने जरूरी है टॉनिक

यों देखा जाए तो टाॅनिक सीधा-सादा अंग्रेजी का शब्द है। इसका अर्थ है कोई भी ऐसी वस्तु जो बल या शक्तिवर्द्धक हो। इंसान को इन टाॅनिकों की क्या जरूरत है। यह जानने से पहले हमें थोड़ी सी जानकारी मानव शरीर के बारे में लेनी पड़ेगी।
मानव शरीर की संरचना
इंसान के शरीर की संरचना व विभिन्न क्रियाओं के लिए कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा के साथ-साथ लौह, जिंक जैसे खनिज लवणों, विटामिनों आदि की जरूरत होती है। एक आम व्यक्ति का भोजन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा की जरूरतें तो पूरी कर देता है पर खनिजों व विटामिनों की जरूरतें अधूरी रह जाती हैं क्योंकि वह कच्ची सब्जियों व फलों में मिलते हैं। भारतीय पाक कला पद्धति में सब्जी खूब भून कर पकाई जाती है और जरूरत पूरी करने की मात्रा में फल खाने की सामर्थ्य हर किसी की होती नहीं है। बच्चों में यह समस्या और भी बढ़ जाती है क्योंकि उनके लिए फल, सब्जियां उपलब्ध होने पर भी वे खाने-पीने के मामले में बड़े नखरे करते हैं। दोष हमेशा पोषण का ही नहीं होता। कभी-कभी किन्हीं कारणों से यह जरूरतें बढ़ भी जाती हैं, जैसे अधिक रक्तस्राव होने पर अधिक लौह तत्व की जरूरत होती है।
कैसे बनता है टाॅनिक
टानिक में शरीर के लिए जरूरी विटामिनों व मिनरलों का घोल होता है। एक-दो प्रकार की शर्करा या फ्लेवर मिलाए जाते हैं तथा आकर्षक दिखाने के लिए खाद्य रंग। अलग-अलग टानिकों में घुले हुए लवणों व विटामिनों की मात्रा अलग-अलग होती है क्योंकि ये विभिन्न जरूरतों के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। मल्टी विटामिन टानिक में अगर समस्त विटामिन होते हैं तो बी काॅम्प्लेक्स के टानिकों में ज्यादा मात्रा में बी-1 से बी-12 तक के विटामिन होते हैं।
चिकित्सकों की स्थिति
आयरन टाॅनिक में लौह तत्व भरपूर मात्रा में होता है। एंटीऑक्सीडेंट टानिक में जिंक व सेलेनियम जैसे लवण अधिक होते हैं यानी टाॅनिक कोई एक अचूक दवा नहीं है जिसको किसी भी प्रकार की कमजोरी में ले लेने से फायदा हो जाएगा बल्कि यह दक्ष चिकित्सक के हाथों उपयोग की जा सकने वाली एक दवा है। उदाहरण के लिए यदि किसी को कमजोरी और थकान लगती है तथा जांच में उसका हीमोग्लोबिन कम पाया जाता है तो चिकित्सक उसकी जरूरत के मुताबिक उसे आयरन या लौह से भरपूर पोषण यानी हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़ व लोहे की कड़ाही में पका खाना खाने की सलाह देने के साथ आयरन टाॅनिक लेने की भी सलाह दे सकता है। साथ ही अगर टानिक लेने से दस्त या कब्जियत की शिकायत होती है तो टानिक बदल या बंद कर सकता है। टानिक के बारे में सबसे दुखद स्थिति तब बनती है जब खुद चिकित्सक अपने पर्चे का वजन बढ़ाने के लिए अथवा दवा कंपनियों से प्रतिकार या सत्कार की अपेक्षा से अपने मरीजों पर जबरदस्ती टानिक का बोझ डालते हैं।
हानिकारक है अधिकता
यहां यह भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि विटामिन की अधिक मात्रा टॉक्सिक या विषकारक भी हो सकती है और नई बीमारी को जन्म दे सकती है। विटामिन ए की अधिकता से बढ़त का रुक जाना, भूख न लगना या फिर हड्डियों की भंगुरता तक हो सकती है। नियोसिन की अधिकता से हॉट फ्लश आने लगते हैं व शरीर में विटामिन सी की बहुतायत होने से पेशाब में ऑक्सेलेट जाने लगते हैं जो पेशाब में जलन या पथरी का कारण बन सकते हैं। विटामिन डी की बहुतायत से वजन में कमी और पतले दस्त होने लगते हैं जो अन्य बीमारियों के जनक बनते हैं। टानिकों के मामले में जरूरत यह समझने की है कि इन उपयोगी दवाओं को सिर्फ मित्रों, पड़ोसियों या कैमिस्टों की सलाह से इस्तेमाल करना उचित नहीं है, बल्कि यदि आपका डॉक्टर भी टानिक लिखता है तो उससे कारण पूछें और अपने रहन-सहन या पोषण में बदलाव ला कर उस रोग के समाधान की सलाह लें।
टाॅनिक नहीं भोजन पर ध्यान दें
बच्चों की भूख बढ़ाने के लिए भी कई टानिक आते हैं। कभी-कभी यह देना डॉक्टरों के नजरिए से आवश्यक होता है किंतु आमतौर पर यह माता-पिता के इस दबाव के कारण डॉक्टरों द्वारा लिखे जाते हैं कि बच्चों की भूख बढ़ाइए। माता-पिता को सोचना चाहिए कि कोई भी टानिक जिंदगी भर तो पीए नहीं जा सकते, इसलिए जितने दिनों टानिक पिया जा रहा है अगर उतने दिनों भूख बढ़ भी गई तो टानिक का प्रभाव समाप्त होने के बाद वह फिर घट जाएगी, इसलिए अपने बच्चों को उनकी रुचि के व्यंजन बना कर खिलाइए।

 

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