साबुत अनाज से स्वास्थ्य लाभ

 

आधुनिकीकरण के कारण हमारा खानपान बहुत ही ज्यादा प्रोसेस्ड हो गया है। गेहूं की बहुत महीन पिसाई की जाती है एवं उसमें से जरूरी पोषक तत्व चोकर को निकाल दिया जाता है। वहीं चावल को मिलिंग के दौरान बहुत अधिक पॉलिश कर दिया जाता है जिससे उसकी जरूरी ऊपरी परत उससे अलग हो जाती है। उसी तरह अन्य अनाज एवं दलहन के साथ किया जाता है। इन दिनों अनाज एवं दलहनों को उत्पादन के बाद उपयोग करने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उसके चलते उसमें मौजूद बहुत सारे सार तत्व उससे पृथक हो जाते हैं और वह जरूरी गुणों से वंचित हो जाता है। साबुत अनाज खाने से शुगर, हृदय रोग, पेट के रोग, बी पी, आदि रोग की स्थिति में लाभ मिलता है। यह लाभ पाने हेतु चावल पालिश किया गया ना हो, आटा दरदरा पिसा हो व चोकर साथ हो, दलहन छिलके समेत हों। दलहनों को विभिन्न रूप में साबुत उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह कई फल सब्जी छिलकों के समेत प्रयुक्त किए जा सकते हैं। ऐसा करने से सेवनकर्ता को बहुत सा ऐसा सार तत्व मिलेगा जो उसे विभिन्न रोगों के उपचार में सहायक होगा। इन सबकी पहली परत पौष्टिकता से परिपूर्ण होती है। अनाज व दलहन इतना प्रोसेस्ड नहीं कि वह जरूरी तत्व को उससे पृथक कर दे।

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