एच1 बी वीजा का आवेदन हुआ महंगा, यूएस ने फीस पर बढ़ाए 10 डॉलर

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नई दिल्ली : अमेरिका में काम करने के लिए आवेदन करना अब जरा महंगा हो गया है। हाल ही में अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वीजा की आवेदन फीस को 10 डॉलर यानी करीब 700 रुपये बढ़ाने की घोषणा की गयी है। बता दें कि इस घोषणा के बाद भारत समेत अन्‍य देशों के आईटी प्रोफेशनल्‍स को एच-1बी वीजा के लिए अब अधिक फीस देनी होगी। एच-1बी वीजा के लिए अभी आवेदन पर करीब 32 हजार रुपये लिए जाते हैं। अमेरिका ने अपनी संशोधित चयन प्रक्रिया के तहत इस संबंध में घोषणा की। फिलहाल एच-1बी वीजा के लिए अभी आवेदन पर 460 डॉलर (करीब 32 हजार रुपए) लिए जाते हैं। इसके अलावा कंपनियों को धोखाधड़ी रोकने और जांच के लिए 500 डॉलर (करीब 35 हजार रुपये) का अतिरिक्त भुगतान भी करना पड़ता है। प्रीमियम क्लास में 1410 डॉलर (करीब 98 हजार रुपये) का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।

नयी इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण प्रणाली के लिए बढ़ाया शुल्क

अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) की ओर से बताया जा रहा है कि यह शुल्क नयी इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण प्रणाली में उपयोगी साबित होगी। दरअसल, एच-1बी चयन प्रक्रिया को, आवेदन करने वालों और संघीय एजेंसी दोनों के लिए प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह प्रणाली लाई गई है। यूएससीआईएस के कार्यकारी निदेशक केन कुसिनेली ने कहा, “इस प्रयास के जरिए ज्यादा प्रभावी एच-1बी कैप चयन प्रक्रिया लागू करने में मदद मिलेगी।” उन्होंने आगे कहा, “इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण प्रणाली हमारे आव्रजन तंत्र को आधुनिक बनाने के साथ ही फर्जीवाड़े को रोकने, जांच प्रक्रियाओं में सुधार करने और कार्यक्रम की अखंडता को मजबूत करने की एजेंसी स्तरीय पहल का हिस्सा है।”

2021 में लागू होगी नयी प्रणाली

सूत्रों के अनुसार वित्त वर्ष 2021 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को संघीय एजेंसी द्वारा नयी प्रणाली का सफल परीक्षण होने के बाद लागू किया जाएगा। औपचारिक निर्णय होने के बाद एजेंसी इसके क्रियान्वयन और शुरुआती पंजीकरण अवधि की निर्धारित समय-सीमा की घोषणा करेगी। साथ ही पंजीकरण संबंधी प्रक्रिया को लागू करने से पहले यूएससीआईएस द्वारा लोगों को कई बार सूचित किया जाएगा। फिलहाल मैनुअल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत एच-1बी वीजा आवेदनकर्ताओं की जांच की कुछ आवश्यक जांच की जाती है। आवेदकों को उनकी उच्च शिक्षा और स्किल्स के आधार पर एच-1बी वीजा दिया जाता है।

बढ़ रही है वीजा खारिज करने की दर

यह घोषणा ट्रंप प्रशासन द्वारा ऐसे समय में की गयी है जब भारतीय लोगों के एच-1बी वीजा खारिज करने में अमेरिका ने बढ़ोत्तरी कर दी है। अमेरिकी थिंक टैंक नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की स्‍टडी के अनुसार, 2015 में जहां 6 फीसदी की दर से वीजा रद्द किया जाता था, वहीं वर्तमान वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में यह दर 24 फीसदी पर पहुंच गयी है।

आईटी प्रोफेशनल्स को होगी दिक्कत

एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है। यह वीजा अमेरिका में कार्यरत कंपनियों द्वारा उन कुशल कर्मचारियों को दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी है। यह वीजा छह वर्ष की अवधि तक वैध होता है। यह वीजा अमेरिकी कंपनियों की मांग के कारण सबसे अधिक भारतीय आईटी प्रोफेशनल्‍स द्वारा प्राप्त किया जाता है। लेकिन जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की सत्ता संभाली है तब से एच-1बी वीजा के नियमों को सख्‍त कर दिया गया है। इस वजह से भारत समेत दुनिया भर के आईटी प्रोफेशनल्‍स को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।

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