गुरू रविदास मंदिर : न्यायालय स्थाई संरचना के लिये याचिका पर सुनवाई को तैयार

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नई दिल्ली : शीर्ष न्यायालय तुगलकाबाद के वन क्षेत्र में गुरू रविदास मंदिर के लिये स्थाई संरचना के निर्माण हेतु आवेदन पर सुनवाई के लिये शुक्रवार को सहमत हो गया। केन्द्र ने मंदिर के लिये लकड़ी का चौकोर केबिन जैसा बनाने का सुझाव दिया था। शीर्ष अदालत ने 21 अक्टूबर को इस मंदिर के पुनर्निर्माण के लिये 400 वर्ग मीटर भूमि आवंटित करने का केन्द्र का संशोधित प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था। इस मंदिर को न्यायालय के आदेश के तहत दिल्ली विकास प्राधिकरण ने गिरा दिया था। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि वह पूर्व सांसद अशोक तंवर और अन्य की याचिकाओं पर 25 नवंबर को विचार करेगी।

चूक वश आदेश का उल्लेख नहीं था : न्यायालय

इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान तंवर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह और अधिवक्ता विराग गुप्ता ने कहा कि 21 अक्ट्रबर को उन्होंने न्यायालय को सूचित किया था कि मंदिर के लिये लकड़ी की संरचना बनाने का केन्द्र का प्रस्ताव उन्हें स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने भी टिप्पणी की थी कि मंदिर का लकड़ी का केबिन नहीं बल्कि स्थाई ढांचा होना चाहिए लेकिन चूक वश आदेश में इसका उल्लेख नहीं है।

मंदिर गिरने पर अनुयायियों ने किया था आक्रोश

तंवर ने अपनी याचिका में कहा है कि मंदिर के ठीक बगल में मौजूद गुरू रविदास सरोवर का केन्द्र के प्रस्ताव के अनुसार पुनरूद्धार किया जाये। याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि प्रस्तावित चाहरदीवारी में गुरू रविदास सरोवर और समाधि को भी घेरा जाये ताकि वे मंदिर परिसर में शामिल रहें। दिल्ली विकास प्राधिकरण ने 9 अगस्त को शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार इस मंदिर को गिरा दिया था। मंदिर गिराये जाने पर गुरू रविदास के अनुयायियों में आक्रोष व्याप्त हो गया था और उन्होंने दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया था।

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