पीरियड्स नहीं, बाथरूम से जुड़ी इस समस्या पर बात करने में शर्माती हैं लड़कियां

नई दिल्ली : कई बार ऐसा होता है कि दौड़ते, छींकते या खांसते समय महिलाओं को बाथरूम लीकेज की समस्या हो जाती है। आप इसे रोकने की चाहे जितनी कोशिश करें लेकिन पैंट में थोड़ी बहुत लीकेज हो ही जाती है। कई बार ये स्थिति बहुत शर्मनाक हो जाती है। ज्यादातर महिलाएं इस समस्या पर बात करने से बचती हैं। ऐसा नहीं है कि यूरीनरी लीकेज सिर्फ उम्र के साथ होने वाली समस्या है। यूरोलॉजिक नर्सिंग में छपी एक स्टडी के मुताबिक, हाई स्कूल और कॉलेज की 25% से अधिक महिला एथलीटों को ये समस्या होती है लेकिन 90% से अधिक महिलाएं इस पर खुलकर बात नहीं करती हैं।
समस्या पर बात करने पर झिझक– ज्यादातर महिलाएं शर्म और झिझक की वजह से इस समस्या को लेकर डॉक्टर के पास नहीं जाती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ब्लैडर लीकेज की समस्या बिल्कुल भी शर्मनाक नहीं हैं। यूरीनरी सिस्टम एक गुब्बारे की तरह होता है जो यूरीन को एक ट्यूब से जोड़कर रखता है। इसके जरिए ही यूरीन शरीर से बाहर आता है। पेल्विस के नीचे की आसपास मांसपेशियां और मूत्रमार्ग का वॉल्व, मूत्रमार्ग को बंद रखने और यूरीन को लीक करने से रोकता है।
क्यों होती है लीकेज की समस्या- अगर ब्लैडर में निचोड़ सा महसूस हो रहा हो तो यूरीनरी लीकेज हो सकती है। बहुत ज्यादा दबाव पड़ने पर भी यूरीन बाहर निकल जाता है। इसे यूरीन इनकंटीनेंस भी कहा जाता है। इनमें सबसे आम स्ट्रेस इनकॉन्टीनेंस होता है जिसमें मूत्रमार्ग यूरीन को लीकेज से नहीं रोक पाता है। अन्य प्रकार के इनकॉन्टीनेंस में ओवरफ्लो और फंक्शनल इनकॉन्टीनेंस भी आते हैं। इस समस्या की चिंता और शर्मिंदगी की वजह से कई महिलाएं अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण हिस्सों का लुत्फ नहीं उठा पाती हैं। इसके कुछ असामान्य कारणों में पेल्विक फ्लोर की कमजोर मांसपेशियां, वजन बढ़ना, सर्जरी, उम्र बढ़ना या डिलीवरी भी हैं।

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