गंगूबाई कहानी है उस औरत की जिसने विपरीत माहौल को अपना बना लिया : आलिया

* उदाहरण बनाएंगे तभी समाज को बदल पाएंगे
* आलिया ने बताया, कितनी चुनौतियों के साथ निभाया गंगूबाई का ​किरदार
* परिस्थितियों को जाने बिना सामने वाले पर टिप्पणी करना गलत
प्रेमिका, पत्नी, वेश्या, फिर माफिया क्वीन से लेकर लेडी डॉन तक का सफर रहा है गंगूबाई का। गंगूबाई की जिंदगी के हर रंग को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है आलिया भट्ट ने। सन्मार्ग के साथ आलिया की हुई खास बातचीत में उन्होंने बताया कैसे बाकी फिल्मों की तुलना में यह फिल्म उनके लिए अलग रही, चैलेंजिंग रहा किरदार के हर शेड को निभाना।


* गंगूबाई काठियावाड़ी की रियल स्टोरी को पर्दे पर उतारा गया है, उसके लिए आलिया की क्या खास तैयारी रही
चुनौती सिर्फ इसलिए नहीं रही कि यह एक रियल बेस्ड्स स्टोरी है बल्कि इसलिए रही कि डिफिकल्ट स्टोरी है। जिस दुनिया से गंगूबाई आती है, जिस मुद्दे को लेकर वह लड़ती है, बहुत ही छोटी उम्र में उन्हें सेक्स वर्कर के तौर पर बेचा गया। वह मुंबई हिरोइन बनने आयी थी, उसे पता भी नहीं था कि उसके साथ ऐसा कुछ होने वाला है, लेकिन उसने अपनी इस जिंदगी को, माहौल को अपनी कमजोरी नहीं अपनी ताकत बना ली। यह कहानी स्ट्रेंथ और उसकी लड़ाई की है। जिंदगी से सवाल है कि मेरे साथ ये क्यों हुआ, कुछ और भी हो सकता था तो जिंदगी के ऐसे स्तर को दिखाना बड़ी चुनौती रही।


* एक प्रेमिका से वेश्या तक का सफर तय किया है गंगूबाई ने…महिला के अलग शेड को निभाना कितना चैलेंजिंग रहा
बहुत ज्यादा चैलेंजिंग रहा। गंगूबाई की जिंदगी कई शेड में रही। वह प्यार भी करती है, प्यार से नफरत भी करती है। बचपना भी उसमें है और गुस्सा भी बहुत करती है। गंगूबाई के शेड आपको पूरी फिल्म में देखने को मिलेंगे। कभी 5 सेकेंड में जो दिखेगा वह अगले पल कुछ और दिखेगा। ये तो आप फिल्म देखकर मुझे बताएं, मैंने ज्यादा बेहतर अदाकारी किस किरदार में की।
* फिल्म के ट्रेलर में ​आपके बिंदास अंदाज को लोगों ने खूब पसंद किया है, इसके लिए क्या खास तैयारी थी
डायलॉग बोलना एक बात है, उसे निभाना एक बात है। गंगूबाई के किरदार में मैं डायलॉग नहीं बोल रही बल्कि उसके अहसासों को बयां कर रही हूं। दर्शकों को जो दिख रहा होता है वह सिर्फ डायलॉग होता है। उसके दो पल पहले क्या होता है, वह क्यों यह बोल रही है, उसमें रम कर मैं डायलॉग बोलती नहीं बल्कि उसे जिंदगी में उतारने की कोशिश करती हूं। अभिनेत्री के तौर पर मैं जो डायलॉग बोलती हूं वह किरदार की जिंदगी होती है।


* माफिया क्वीन के रूप में गंगूबाई का किरदार निभाना कैसा लगा
हां, अलग तरह का किरदार रहा है। माफिया क्वीन का टैग करीम लाला ने दिया था जो फिल्म में रहीम लाला है। रहीम लाला और गंगूबाई का रिश्ता बहुत दिलचस्प रहा है जिसकी वजह से गंगूबाई को दिशा मिली। उन्हें ताकत दी, जिसके बाद वह अपनी लड़ाई अच्छी तरह से लड़ सकी और कमाठीपुरा की औरतों के लिए कुछ कर सकें।
* फिल्म का वह सीन या डायलॉग जिसे करने में आलिया अंकम्फर्टेबल हुई
नहीं…अंकम्फर्टेबल मैं नहीं कहूंगी। मैंने पहले ही कहा है कि यह पूरा सफर चैलेंजिंग रहा है, आसान कुछ भी नहीं रहा है। चैलेंज हर चीज में है, ढोलिडा में 50 सेकेण्ड का सीन है जिसे देखने के बाद मुझे लगा था कि मैं नहीं कर पाऊंगी लेकिन मैंने कर दिखाया और बेहतरीन किया।


* सन्मार्ग ने ‘अपराजिता’ के रूप में महिलाओं को आगे बढ़ने का प्लेटफार्म दिया है, ठीक उसी तरह गंगूबाई ने वेश्यावृत्ति से जूझ रही महिलाओं के लिए ढाल बनी। समाज के लिए यह एक मैसेज है कि पुरुषप्रधान समाज में महिलाएं हर कुछ कर सकती हैं बस जरिया मिलना चाहिए…आप क्या मैसेज देंगी इसे लेकर
वेश्यावृत्ति हमारे समाज का सबसे पुराना पेशा है, इस बात से हम मुकर नहीं सकते हैं। इस बात को समाज में समझने की जरूरत है। लोग अपनी राय दे देते हैं ​बिना सोचे कि इसके पीछे उसका कारण क्या होगा, परिस्थितियां क्या होंगी। इंसान के तौर पर हम किसी का अधिकार नहीं छीन सकते। कई बार जानवरों को इनसे ज्यादा हम अधिकार दे देते हैं, उसमें बुराई नहीं है यह उनका भी अधिकार है क्योंकि वे बेजुबान हैं। लेकिन हम ऐसा भेदभाव करते रहे तो बिखराव होगा। सन्मार्ग ने अपराजिता के जरिये महिलाओं को जो दिशा दी वह असल में उन्हें उनका सम्मान दिया जो समाज के बाकी लोगों के लिए उदाहरण पेश करने वाला है। उदाहरण नहीं बनाएंगे तो सदियों से जो होता आ रहा है वह बदल नहीं पाएंगे जो गलत है। मुश्किल यह है कि हम बहुत जल्दी बिना सोचे सामने वाले पर अपनी राय दे देते हैं।

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