झुर्रियों से बचाते हैं फल व सब्जियां

चेहरे या शरीर में झुर्रियों का होना बुढ़ापे की पहचान मानी जाती है। यह एक आम धारणा है। पहले 40-50 वर्ष की आयु के उपरान्त ऐसा होता था किंतु अब युवाओं को असमय बुढ़ापा आ रहा है। चेहरे पर सिकुड़न नजर आने लगी है। यह खानपान के पौष्टिक विहीन होने के कारण हो रहा है। वर्तमान का तनाव भी उसका सह कारण है। अंकुरित अनाज व फल-सब्जी को खानपान में स्थान देकर झुर्रियों की गति धीमी की जा सकती है। इसमें कमी लाई जा सकती है। ये प्राकृतिक सजीव आहार माने जाते हैं। ये फास्ट फूड व जंक फूड की तरह निर्जीव नहीं होते। अंकुरित अनाज व फल सब्जी की पौष्टिकता सबके शरीर के लिए सदैव उपयुक्त होती है। इसे खानपान में अपनाकर यथोचित लाभ पाया जा सकता है।
हृदय रोगी बढ़ रहे हैं प्रदूषण से
आधुनिकता के साथ-साथ प्रदूषण सर्वव्यापी होता जा रहा है। इससे आज कोई क्षेत्र अछूता नहीं है। महानगर और कारखाना बहुल इलाके को इसने भयावह रूप से अपनी चपेट में ले लिया है। यह हृदय रोगी एवं मधुमेहियों की संख्या बढ़ा रहा है। बढ़ता प्रदूषण रक्त में आक्सीजन की कमी कर उसमें थक्का जमा रहा है। यह हृदय रोगियों के बढ़ने का कारण बन रहा है। वहीं यह प्रदूषण शरीरांगों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है जिससे अग्नाशय, किडनी, लिवर, फेफड़े, पाचन प्रभावित हो रहे हैं। परिणामत: ऐसे प्रभावितों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है जबकि प्रदूषण में कमी की संभावना क्षीण है।
स्वस्थ रहना है तो घुल मिलकर रहिए
स्वस्थ रहने की चाहत सबमें होती है पर कई मामले में हम स्वयं के कारण अथवा अन्यान्य बाह्य कारणों से प्रभावित होकर रोगी बन जाते हैं। खानपान, श्रम व जीवन शैली का आपस में तालमेल नहीं बैठ पाता है जबकि सबका जीवन में सम्यक रूप से महत्त्व है। अतएव खानपान के साथ श्रम व जीवन शैली का तालमेल बिठाइये और घर से लेकर कार्यस्थल तक आपस में घुलमिल कर रहना सीखिए। सुख-दु:ख बांटिए। बात कीजिए। जीवन के हर रूप का भरपूर आनन्द उठाइए। सहअस्तित्व बनाए रखिए। यह स्वस्थ रहने में मददगार होगा।
कम मात्रा में ली जाए तो दवा नहीं तो जहर
जिस प्रकार भोजन के मध्य कम मात्रा में लिया गया पानी अमृत के समान होता है, उसी तरह जो वस्तु कम मात्रा में ली जाए वही दवा है और वही रोग को दूर करने में काम आती है किंतु यही यदि जल्द ठीक होने या किसी अन्य कारण से अधिक मात्रा में ले ली जाए तो जहर बन जाता है। हम दवा के रूप में पूरी बोतल या एक स्ट्रिप लेते हैं पर उसका सेवन चिकित्सक के अनुसार ही निर्धारित मात्रा में करते हैं, तभी रोग दूर होता है पर कोई यदि जल्दी ठीक होने के लिए पूरी शीशी या पूरी स्ट्रिप एक साथ ले ले तो वह लाभ पहुंचाने की अपेक्षा नुकसान जरूर पहुंचाएगा। शरबत, चाय या शराब कम मात्रा में ही लाभकारी हैं नहीं तो नुकसानदेह हैं।
मासिक की तकलीफ बचाए खानपान
मासिक के दौरान लड़कियों को तकलीफ होना सामान्य बात है। सम्पूर्ण नारी वर्ग को अपने जीवन काल में अवश्य इस तकलीफ का सामना करना पड़ता है। खानपान में सामान्य बदलाव लाकर उस तकलीफ से बचा जा सकता है या इसमें कमी की जा सकती है। मांसाहार एवं गरिष्ठ भोजन को त्याग दें। मक्खन, तेल, बटर, पनीर छोड़ दें। फल, साग, सब्जी, सलाद भरपूर खाएं। खानपान में कम तेल मसाला हो। यदि नारी वर्ग खानपान में इस भांति सुधार करेगा तो उसे मासिक पूर्व की तकलीफों से राहत मिलेगी या उनमें कमी आएगी। माहवारी से पूर्व गर्भाशय एवं पेडू में दर्द के मामलों में उससे निजात मिल सकती है।

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