खाद्य वनस्पतियां बीमारियों से बचाती हैं

दुनिया भर में संक्रामक रोगों की तुलना में गैर संक्रामक रोगों के कारण 63 प्रतिशत लोगों की मौत होती है। हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, मोटापा आदि जैसे कारणों से ये मौतें होती हैं। ये बीमारियां मामूली पोषक तत्वों की कमी के कारण होती हैं। पोषक तत्व हमें खाद्य वनस्पतियों के माध्यम से मिल सकते हैं। इनकी पूर्ति काली मिर्च, दालचीनी, लहसुन, प्याज, मसूर, जैतून, कद्दू, अजवाइन, सिंघाड़ा, कमलनाल आदि हैं। ये सभी वनस्पतियां हमें बाजार में बड़ी सरलता से मिल जाती हैं। इनके सेवन से आनुवंशिक एवं जैविक कारणों से होने वाली बीमारियां नियंत्रित हो जाती हैं। हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, मोटापा आदि हमें आनुवंशिक एवं जैविक कारणों से हो सकती है। इन्हें खाद्य वनस्पतियों जैसे काली मिर्च, दालचीनी, लहसुन, प्याज, मसूर, जैतून, कद्दू, अजवाइन, सिंघाड़ा, कमलनाल आदि को भोजन में शामिल कर रोक सकते हैं।
बहुत गुणकारी है इलायची

सुगंधित वस्तु इलायची से सभी परिचित हैं। इसे बहुत लोग भोजन के बाद या पान के साथ खाना पसंद करते हैं। इलायची दो प्रकार की होती है जैसे छोटी इलायची, बड़ी इलायची। वैसे यह मसालों की श्रेणी में आती है। छोटी इलायची भोजन के सुगंध एवं स्वाद को बढ़ाती है। इसका उपयोग दूध, चाय, कॉफी या मीठे पदार्थों में अधिकतर किया जाता है जबकि बड़ी इलायची का उपयोग खानपान में अन्य मसालों के साथ किया जाता है। यह भी स्वाद एवं सुगंध को बढ़ाने में सहायक है। बड़ी इलायची का उपयोग पुलाव, सब्जी एवं नमकीन चीजों में किया जाता है। इलायची सभी रूप से मुख एवं पेट काे शुद्ध करने की क्षमता रखती है। इसके सेवन से गले की तकलीफ दूर होती है। यह पाचक का काम करती है। छोटी इलायची पेट के अम्ल का दूर करती है।
दवाओं को तोड़कर खाना ठीक नहीं

सभी दवा निर्माता दवा में मिले रसायनों एवं उसकी क्रिया को देख उसे टिकिया, कोटेड या कैप्सूल अथवा पाउडर एवं लिक्विड फार्म में निर्माण करते हैं। डॉक्टर भी रोगी की आयु व प्रकृति के अनुसार दवा सुझाते हैं। ऐसी दवाओं को तोड़कर खाने, पीसकर खाने या किसी के साथ मिलाकर खाने से उसका प्रभाव करने का रूप बदल जाता है अथवा विपरीत व अन्य प्रतिक्रिया करती है। दवाओं का तेज रसायन नुकसान करता है। साइड इफेक्ट पैदा करता है अथवा विकृति पैदा करता है। बच्चों को दी जाने वाली अधिकतर दवा तरल रूप में शक्कर मिश्रित होती है। कैप्सूल पेट के अंदर जाकर खुलता एवं घुलता व प्रभाव करता है। इस कैप्सूल के भीतर दवा चूर्ण रूप में होती है। टिकिया पेट के अंदर जाकर घुलती है एवं दो घंटे में उसका पूरा प्रभाव दिखता है। कुछ दवाएं टिकिया के रूप मेंं शुगर कोटेड होती हैं। ये भी पेट के अंदर जाकर घुलती व प्रभाव दिखाती हैं अतएव डॉक्टर के सुझाये अनुसार ही दवा लें एवं शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पाएं।

 

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