फूड ऑयल सेहत के लिए फायदेमंद भी है और नुकसानदेह भी, पढ़ें

नई दिल्ली : खाना बनाने के लिए तेल का इश्तेमाल हम सभी करते हैं, लेकिन तेल आपका स्वास्थ भी तय करते हैं। ट्रांस-फैटी एसिड (टीएफए) वसा का सबसे हानिकारक प्रकार है। यह दुनिया भर में दिल के रोगों और स्ट्रोक का प्रमुख कारण है। आमतौर पर यह दो तरह से तैयार होता है, – आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल (औद्योगिक टीएफए) और जानवरों से।  रिपोर्ट्स बताते हैं कि दोनों तरीकों से प्राप्त वसा रक्त कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल पर बुरा प्रभाव डालती है, जिससे दिल की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। दिल के स्वास्थ्य पर ट्रांस-फैट के गंभीर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने हाल ही में ट्रांस-फैट के उच्च स्तर वाले खाद्य पदार्थों से होने वाले नुकसान के बारे में उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए ईट राइट मूवमेंट शुरू किया है।

एफएसएसएआई वर्ष 2022 तक भारतीय खाद्य प्रणाली से औद्योगिक रूप से उत्पन्न टीएफओ को खत्म करने के लिए काम कर रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2023 तक दुनिया को टीएफए से मुक्त करने की समय सीमा तय की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ आम तौर पर मानते हैं कि स्वस्थ दिल के लिए लोगों को पशु-आधारित वसा स्रोतों (जैसे कि मक्खन, घी) की बजाए वनस्पति तेलों का चयन करना चाहिए, वनस्पति तेलों का बार-बार इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और हाइड्रोजनीकृत वसा / वनस्पति तेल से बने खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
तेल से बने कुकीज और बिस्कुट, गैर-डेयरी वसा-आधारित आइसक्रीम / ठंडे डेजर्ट व चॉकलेट और भुने हुए स्नैक्स और बेकरी आइटम इस्तेमाल करें, जिन्हें हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल में तला या पकाया नहीं गया हो। भारत में आम तौर पर खाना पकाने के लिए तेल और वसा का इश्तेमाल किया जाता है। वसा और तेल से तय होता है कि खाना कितना हेल्दी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर, प्रभारी शिक्षक, खाद्य, पोषण और खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स डॉ. रजनी चोपड़ा का कहना है कि अधिकांश वनस्पति तेल दिल को स्वस्थ रखते हैं। पौधों पर आधारित वनस्पति तेल कोशिका के स्तर पर बेहतरीन कार्य को बनाए रखने के लिए सही पोषक तत्व प्रदान करते हैं। असंतृप्त वसा की जगह संतृप्त वसा को इस्तेमाल करने से असाधारण स्वास्थ्य लाभ होता है। रजनी का कहना है कि मक्खन (संतृप्त वसा) की जगह सूरजमुखी के तेल (असंतृप्त वसा) का इस्तेमाल करने से रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है और दिल के रोग व स्ट्रोक का जोखिम कम होता है। इसके अलावा भारत में अधिकांश वनस्पति तेलों में विटामिन ए और डी होता हैं जो समग्र स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए आवश्यक हैं।

ट्रांस-फैट, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, मठरी आदि स्नैक्स के माध्यम से हमारे आहार में प्रवेश कर सकता है। इस साल की शुरुआत में जारी हार्वर्ड विश्वविद्यालय समर्थित ईएटी लैंसेट रिपोर्ट ने एक ‘प्लैनेटरी हेल्थ डाइट’ की पहचान की है, जिसमें कहा गया है कि तेल और वसा की कुल खपत लगभग 10 चम्मच / दिन तक सीमित होनी चाहिए, जिसमें घर के पके भोजन में शामिल वसा और स्थानीय भोजनालयों व पैकेटबंद भोजन में शामिल अदृश्य वसा शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी आधी से ज्यादा मात्रा विभिन्न प्रकार के वनस्पति स्रोतों से असंतृप्त वसा / तेल से पूरा किया जाना चाहिए।

वहीं एम्स डॉ अनुजा अग्रवाल, एमएससी (आरडी), सीनियर डाइटिशियन (बाल रोग), बाल रोग विभाग, एम्स का कहना है कि सरसों के बीज का तेल, मूंगफली का तेल, सूरजमुखी का तेल और नारियल तेल जैसे वनस्पति तेल पारंपरिक रूप से हमारी संस्कृतियों में रोजमर्रा के आहार का हिस्सा रहे हैं। आम तौर पर इन तेलों के लाभ को हम कम आंकते हैं। अनुजा का कहना है कि खाना बनाने के तरीके को समझें और फिर गरम किए गए / फिर से इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल (समोसा, कचौरी, कटलेट, स्प्रिंग रोल, डीप-फ्राइड डिम सम, फ्राइज़ आदि) से बनी चीज़ों से बचें। सड़क के किनारे मिलने वाले खाने के सामान को तलने के लिए एक ही तेल का बार-बार इस्तेमाल किया जाता है, इस तरह तले हुए उत्पादों में ट्रांस-फैट की मात्रा ज्यादा हो सकती है। स्नैक्स, भुजिया, नमकीन और बेकरी उत्पादों केक पफ्स, खारी, और नानखताई के इस्तेमाल में भी सावधानी बरतें।

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