जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे चुनाव अधिकारी

नई दिल्ली : केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। चुनाव की तैयारी को लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने जिला चुनाव अधिकारियों के साथ बैठक की है। प्रदेश में होने वाले चुनाव को देखते हुए अधिकारी अभी से तैयारियों में जुट चुके हैं। बताया जा रहा है कि यहां साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। मालूम हो कि फिलहाल घाटी में अमरनाथ यात्रा का दौर चल रहा है। यह भव्य यात्रा 15 अगस्त को समाप्त होगी जिसके बाद चुनाव आयोग प्रदेश में विधानसभा चुनाव तारीख तय की जाएगी।

मतदाता सत्यापन कार्यक्रम की समीक्षा

विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्य चुनाव अधिकारी शैलेंद्र कुमार दो अगस्त को जिला अधिकारियों और चुनाव कर्मियों के साथ बैठक करेंगे। इन अधिकारियों की बैठक वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से होगी। इस बैठक में अधिकारी मतदान सत्यापन कार्यक्रम की समीक्षा करेंगे। चुनाव को लेकर मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं के नामों की जांच की जाएगी। साथ ही लोग अपना नाम मतदाता सूची से जुड़वा सकते हैं। इसके अलावा मतदाता विवरण में बदलाव तथा वोटर कार्ड में सुधार करवा सकेंगे।

अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को तैनात

सरकार राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए ‌अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को तैनात किया गया था। जिसमें 20 कंप‌नियों को जम्मू और 20 को कश्मीर भेजा गया था। बड़े पैमाने पर अर्धसैनिक बल के जवानों को देख प्रदेश में हलचल का माहौल था। जिसे लेकर सरकार पूरी तरह चौकस थी। लोगों ने कयास लगया था कि केंद्र सरकार प्रदेेश से अनुच्छेद 35ए हटा रही है।

जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग

जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय को पार्टी का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं भाजपा के महासचिव राम माधव ने चुनाव आयोग से प्रदेश में जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग की है।

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू

गौरतलब  है कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की गठबंधन वाली सरकार थी। प्रदेश में गठबंधन टूट जाने के बाद यहां 19 जून 2018 में राज्पाल शासन लागू किया गया। मालूम हो कि पिछले साल 21 नवंबर को विधानसभा भंग कर दी गई थे। प्रदेेश में छह महीने बाद राज्यपाल शासन खत्म होने के बाद इसी साल जनवरी में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। नियम के अनुसार विधानसभा भंग होने के छह महीने के अंदर राज्य में चुनाव कराने होते हैं।

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