तनाव कम करने के सहज उपाय

‘सुख-दुख’ इन दो अनुभूतियों के धागों से मनुष्य का पूरा जीवन बुना गया है। इन्हीं दो पटरियों पर अदल-बदल कर चलते-चलते जीवन की गाड़ी अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाती है। आवश्यक नहीं है कि राह में ठोकर न हो या कहीं जीवन की गाड़ी लड़खड़ाये नहीं। जीवन में अनेक उत्सव जन्म, पद-प्रतिष्ठा, सम्मान, प्रिय का आगमन, ये सारे हर्षोल्लास के क्षण हैं। ये जीवन की गाड़ी को सुख की पटरियों से प्रसन्नता के स्टेशन तक ले जाते हैं।

दूसरा पहलू दु:ख होता है। मनुष्य के हँसते-खेलते जीवन में मृत्यु, बीमारी विछोह, अपमान, असफलता अनेक दुखद पटरियों से चलकर जीवन की गाड़ी दु:ख एवं निराशा के स्टेशन पर जाकर खड़ी हो जाती है। तब कुछ क्षण वहाँ खड़ा होना असह्य हो जाता है।
हमें जीवन के अनेक उदास क्षणों को सरस बनाने का प्रयास करना चाहिए। लोग दुखों के क्षण में निरंतर डूबते चले जाते हैं, गम के अतीत कालीन समुद्र में। उसी प्रकार खुशी में भी सीमांकन नहीं कर पाते। जीवन छोटा है, काम अधिक, घटनाएँ अधिक। वैचारिक विरोध एवं प्राकृतिक प्रकोप भी रहेंगे। नियति का क्रम भी जारी रहेगा। तब आइये देखते हैं उदासी कैसे कम होगी?

नन्हे बच्चों के साथ जितना भी समय गुजरता है-वे दिल को गुदगुदाने वाले अनेक प्रसंग सामने लाते हैं। क्षण का भारीपन हल्केपन में बदल जाता है। बच्चों की निश्छल अदायें अपनी हरकतों से गहरी से गहरी उदासी की जड़ें फोड़ डालती हैं।

उदास आदमी यदि अकेला हो तो वह दोहरी उदासी का एहसास करेगा। उसकी उदासी घटने के बजाय बढ़ती जायेगी। किसी प्रिय व्यक्ति को फोन करके भी दिल की आवाजें पहुंचाई जा सकती हैं। हम भावनात्मक सहारा पा सकते हैं। हो सकता है कि फोन करने पर वे बातें हो पायें जो मन की निराशा एवं उदासी को छाँट जायें लेकिन फोन से ज्यादा प्रभावोत्पादक किसी को पत्र लिखना भी हो सकता है। पत्र के माध्यम से मन की व्यथा को कागज पर उतार कर हम दिल का बोझ हल्का कर सकते हैं।

यदि उदास व्यक्ति दैनिक डायरी लिखता हो तो उदासी के दिनों में यह आदत बेहद सहयोगी होती है। साहित्य का सृजन दु:खों के बाद सबसे यथार्थ रूप में होता है। दैनिक डायरी में अपनी साहित्यिक मनोभावनाओं को व्यक्त कर मानसिक शांति पाई जा सकती है। उस क्षण अच्छे गीत, कहानी, कविता या बड़े उपन्यास लिखे जा सकते हैं। हमें तुलसी और सूर के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिये। यद्यपि पहले ही कहा जा चुका है कि ‘वियोगी होगा पहला कवि।’ उदासी को वियोग का पर्याय नहीं मान सकते पर आत्म वेदना का दर्पण कह सकते हैं।

उदासी का कारण जानना आवश्यक नहीं लेकिन यह अवश्य जान लेना चाहिये कि लम्बी उदासी किसी भी व्यक्ति के जीवन में अनेक रोगों का कारण बन सकती है। यदि दर्द का खजाना लिये वह व्यक्ति अन्दर ही अन्दर घुटता रहे तो एक दिन वह दिल का मरीज हो सकता है। उदास व्यक्ति के उदासी अभिव्यक्त करने के ढंग अलग-अलग हो सकते हैं। उदासी कभी मौन होती है, कभी क्रोधी। उदास दिल कब, कहाँ, क्या मोड़ ले, यह कहना मुश्किल है। यही ध्यान रखना होता है कि जब उदास होंठों से जिंदगी के गम बाहर आयें तो सामने बैठे व्यक्ति ठीक उसी प्रकार धीरे-धीरे विनम्र भाषा में उन अन्दर के अन्धकारों को काटने का प्रयास करें जिस प्रकार एक मां लोरी गाकर अपने नन्हे लाडले की सारी थकान हर लेती है। उदासी हटाने वाले को सहृदय होना आवश्यक है। हो सकता है कि उदास आदमी सदैव नकारात्मक पक्ष से बातें करे। उसकी भावनाओं का काट न करते हुये उसकी बातें सुन लेने का प्रयास शीघ्र ही उदासी छाँट सकता है। हमें थोड़ी हँसी-खुशी और सभ्य मजाक को प्रश्रय देना चाहिये। अक्सर दो प्यार करने वाले जब करीब हों तो उनका पल-पल बदलता नवीन अंदाज मन को खुश कर सकता है। कुछ ऐसे मजाकिया रिश्ते भी होते हैं जिन्हें देखकर या उनके करीब होने से सारे तनाव जाते रहते हैं। मानसिक परेशानी को छोटा न समझें लेकिन उसे सदैव छोटा बनाने का प्रयास अवश्य करेें।

 

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