दुर्गा सप्तशती पाठ करने में ना करें ये गलतियां, होगी हानि

नई दिल्लीशारदीय नवरात्रि शुरू हो गए हैं। इस साल देवी मां का पावन पर्व आठ दिन का है। इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का पूजन करने का विधान है। वहीं नवरात्रि में यदि दुर्गा सप्तशती का पाठ करें तो विशेष फल मिलता है। दुर्गा सप्तशती पाठ विधि-विधान और नियम के साथ किया जाना आवश्यक है। दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय हैं। इन 13 अध्याय को नवरात्रि में नियम के साथ पढ़ते हैं, तो आपके जीवन में जितनी भी परेशानियां आ रही हैं, चाहे गृह कलेश हो या फिर धन से जुड़ी समस्याएं, दुर्गा मां आपके हर कष्ट को दूर कर देती हैं। आइये आपको बताते हैं दुर्गा सप्तशती पाठ के 10 नियम।

इस बार मिलेगा विशेष लाभ

इस साल गुरुवार के दिन से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हुई है। पुराणों के अनुसार, गुरुवार के दिन से दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शुरू किया जाए, तो दो लाख चंडी के पाठ करने जितना फल मिलता है।

इन नियमों का रखें ध्यान 

1. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन के साथ होती है, इसलिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले ध्यान रखें, कि गणेश पूजन करें। यदि कलश स्थापना की गई है तो कलश पूजन, नवग्रह पूजन और ज्योति पूजन के बाद सप्तशती पाठ शुरू करें।

2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले श्रीदुर्गा सप्तशती की पुस्तक को साफ स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर रखें। इस दौरान ध्यान रहे कि जिस स्थान पर पुस्तक रखी गई है, उसे शुद्ध कर लें। इसके बाद कुमकुम, चावल और पुष्प से पूजन करें। इसके बाद अपने माथे पर रोली लगाकर पूर्वाभिमुख होकर तत्व शुद्धि के लिए 4 बार आचमन करें।

3. दुर्गा सप्तशती का हर मंत्र, ब्रह्मा, वशिष्ठ और विश्वामित्र जी द्वारा शापित किया गया है। इसलिए श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ में कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र के पाठ से पहले शापोद्धार करना जरूरी है। शापोद्धार के बिना इसका सही प्रतिफल प्राप्त नहीं होता है।

4. यदि एक दिन में पूरा पाठ न किया जा सके, तो पहले दिन केवल मध्यम चरित्र का पाठ करें और दूसरे दिन शेष 2 चरित्र का पाठ करें। या फिर दूसरा विकल्प यह है कि एक, दो, एक चार, दो एक और दो अध्यायों को क्रम से सात दिन में पूरा करें।

5. वाक सिद्धि और मृत्यु पर विजय पाने के लिए श्रीदुर्गा सप्तशती में श्रीदेव्यथर्वशीर्षम स्रोत का नित्य पाठ करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें कि इसे पूरे विधान के साथ किया जाना आवश्यक है।

6. श्रीदुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले और बाद में नर्वाण मंत्र ‘ओं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे’ का पाठ करना अनिवार्य है। इस एक मंत्र में ऊंकार, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां काली के बीजमंत्र निहित हैं।

7. यदि श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ संस्कृत में करना कठि‍न लग रहा हो तो हिन्दी में ही सरलता से इसका पाठ करें। हिन्दी में पढ़ते हुए आप इसका अर्थ आसानी से समझ पाएंगे।

8. श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ करने के दौरान ध्यान रखें कि उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए। इसका पाठ जोर से न करें और नाहीं उतावले हों। शारदीय नवरात्र में मां अपने उग्र स्वरूप में होती है। इसलिए विनयपूर्वक उनकी आराधना करें।

9. श्रीदुर्गा सप्तशती के पाठ में कवच, अर्गला, कीलक और तीन रहस्यों को भी सम्मिलत करना चाहिए। दुर्गा सप्तशती के पाठ के बाद क्षमा प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए, ताकि अनजाने में आपके द्वारा हुए अपराध से मुक्ति मिल सके।

10. श्रीदुर्गा सप्तशती के पाठ के दौरान किसी भी अध्याय को अधूरा न छोड़ें। सप्तशती के प्रथम, मध्यम और उत्तर चरित्र का क्रम से पाठ करने से सभी मनोकामना पूरी होती हैं। इसे महाविद्या क्रम कहते हैं। दुर्गा सप्तशती के उत्तर, प्रथम और मध्य चरित्र के क्रमानुसार पाठ करने से शत्रुनाश और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। इसे महातंत्री क्रम कहते हैं।

 

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