मौसम का प्रभाव न करे आपको बीमार

सर्दियां खाने पीने के लिहाज से बहुत अच्छी लगती हैं। इस मौसम में खाना खाया भी जाता है और पच भी जाता है पर डायबिटीज, एलर्जी, ऑस्टियोपोरोसिस, दिल की बीमारी और अवसाद ग्रस्त लोगों को इस मौसम में अपना खास ध्यान रखना होता है ताकि वे भी सर्दियों का आनंद उठा सकें। सर्दियां स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छी मानी जाती हैं पर गिरता तापमान वायरस की संख्या को बढ़ाने में मदद करता है इसलिए ध्यान रखना भी जरूरी है।

डायबिटीज के रोगी रखें ध्यान :- सर्दियों में डायबिटीज के रोगियों का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ठीक से न पचने के कारण कब्ज, गैस की समस्या और कमजोरी बढ़ जाती है। सर्दियों में शरीर ग्लूकोज को पचाने में सक्षम नहीं होता। ऐसे रोगियों को प्रोटीन का सेवन थोड़ा बढ़ा लेना चाहिए ताकि शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहे। अगर ध्यान न रखा जाए तो कमजोरी बढ़ने से रोगी बार-बार बीमार होने लगता है। सर्दियों में डायबिटीज के रोगी को दालें व सूखे मेवे नियमित खाने में दें। प्रोटीन युक्त आहार को पचाने के लिए सैर अवश्य करें ताकि जोड़ों के दर्दों से भी बच सकें। धूप में अवश्य बैठें ताकि विटामिन डी शरीर को मिल सके।

एलर्जी वाले रोगी भी रखें ध्यान :- सर्दियों में स्वयं को सर्दी से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनना जरूरी होता है। गर्म कपड़े बहुत से लोगों को एलर्जी की समस्या बढ़ा देते हैं। शरीर में खुजली परेशान करती है, रूखी त्वचा वालों को भी सर्दियों में एलर्जी परेशान करती है। सर्दियों की सर्द हवाओं से खांसी-जुकाम भी एलर्जी का एक हिस्सा होते हैं जो बच्चों, बुजुर्गों को बहुत परेशान करते हैं। सर्दी जुकाम में डाॅक्टर की सलाह से इनहेलर का प्रयोग कर स्वयं को इससे दूर रख सकते हैं। एंटी एलर्जिक दवाएं और एंटी एलर्जिक क्रीम या स्प्रे का आवश्यकता पड़ने का प्रयोग कर स्वयं को बचा सकते हैं। जिन्हें एलर्जी की शिकायत हो, उन्हें धूम्रपान से बचना चाहिए और धूम्रपान करने वालों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। ट्रैफिक जाम और अधिक रश वाले परिवहन साधन भी सांस की तकलीफ बढ़ाते हैं। उनसे बचें। अगर खुजली परेशान करे तो माॅश्चराइजर का प्रयोग करें। अधिक खुजली होने पर एंटीएलर्जिक बाम या स्प्रे का प्रयोग करें।

दिल से संबंधित रोगी भी रखें ध्यान :- सर्दियों में रक्तवाहिनियां सिकुड़ जाती हैं जिनका प्रभाव हृदय को खून पहुंचाने वाली धमनियों पर भी पड़ता है। हृदय को रक्त की सप्लाई की रफ्तार धीमी पड़ जाती है जिससे हृदय रोगियों को हार्ट अटैक होने का खतरा बढ़ जाता है। हृदय रोगियों को उचित गर्म कपड़े पहनने चाहिए। कानों को भी ढक कर रखना चाहिए। हाथ पैरों को भी गर्म रखना चाहिए। प्रात: और देर शाम बाहर जाने से बचना चाहिए। शरीर को गर्मं रखने के लिए सब्जियों का गर्म सूप पीएं, अपने बिस्तर को गर्म पानी की बोतल रख कर गर्म रखें। ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाते रहें।

ऑस्टियोपोरोसिस के रोगी भी रखें ध्यान :- ऑस्टियोपोरोसिस के रोगी की हड्डियां कमजोर होती हैं और हड्डियों के बीच घनत्व भी कम हो जाता है। ऐसे में ठंड के दिनों में जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है और झटका लगने से या चोट लगने से हड्डी टूटने का खतरा बना रहता है। ऑस्टियोपोरोसिस के रोगियों की अधिकतर कलाई,रीढ़, कूल्हे,घुटनेे की हड्डी टूटती हैं। सर्दियों में ऐसे रोगियों को धूप में अधिक देर बैठना चाहिए, ज्यादा झुकने वाले, भार उठाने वाले कामों से बचना चाहिए। कैल्शियम युक्त आहार का नियमित सेवन करें। जंक फूड और कार्बोहाइड्रेट ड्रिंक्स का सेवन न करें। बादाम, पिस्ता जैसे मेवे खाकर हड्डियों को मजबूत रख सकते हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड के लिए अखरोट का सेवन भी करें। विटामिन 3 के लिए सूरज की धूप जरूरी है सर्दियों में धूप का लाभ उठाएं और विटामिन डी की कमी की पूर्ति करें। हड्डियों की मजबूती, निर्माण और धनत्व के लिए व्यायाम का अहम रोल है। व्यायाम नियमित करें पैदल चलकर, जाॅगिंग कर, वेट लिफ्टिंग कर, योगा आदि से अपनी हड्डियों को दुरुस्त रखें।

 

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