चैत्र नवरात्र पूजा-पाठ के ल‍िए ये सामग्रियां लेना न भूलें, पूजा रह जाती है अधूरी

कोलकाताः चैत्र नवरात्र की शुरुआत कल यानी क‍ि 13 अप्रैल मंगलवार से हो रही है। ऐसे में यकीनन आप भी मां दुर्गा की पूजन सामग्री ल‍िस्‍ट तैयार ही कर रहे होंगे। लेक‍िन आप कुछ भूल न जाएं और कहीं आपकी पूजा अधूरी न रह जाए इसल‍िए हम इस आर्टिकल ls जान लेते हैं क‍ि कलश स्‍थापना और मां भवानी की पूजा के ल‍िए जरूरी सामग्रियां क्‍या हैं?
देवी भगवती पूजन की जरूरी सामग्र‍ियां

श्रीदुर्गा की सुंदर प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, आसन, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल और नवग्रह पूजन के लिए सभी रंग के फूल भी अवश्य रखें।
मंगल कलश
पुराणों में कलश को सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि कलश में सभी ग्रह, नक्षत्रों एवं तीर्थों का निवास होता है। इनके आलावा ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, सभी नदियों, सागरों, सरोवरों एवं तैतीस कोटि देवी-देवता भी कलश में विराजते हैं। इसलिए पूजन के दौरान कलश को देवी-देवता की शक्ति, तीर्थस्थान आदि का प्रतीक मानकर स्थापित किया जाता है।
जौ
नवरात्रि पूजा के पहले दिन घटस्थापना के साथ ही जौ बोना बेहद शुभ माना गया है। हरे-हरे जौ समृद्धि,शांति,उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जौ उगने की गुणवत्ता से भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। माना जाता है कि अगर जौ तेज़ी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आती है वहीं अगर ये बढ़ते नहीं और मुरझाए हुए रहते हैं तो भविष्य में किसी तरह के अनिष्ट का संकेत देते हैं।
बंदनवार
वैदिक काल से ही किसी भी शुभकार्य या पूजा-अनुष्ठान के दौरान घर के प्रवेशद्वार पर आम या अशोक के ताज़े हरे पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है। ऐसा करने के पीछे मान्यता यह है कि इससे घर में नकारात्मक या बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। माना जाता है कि देवी पूजा के प्रथम दिन देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी होती हैं। देवी घर में प्रवेश करती हैं। वहीं बंदनवार लगे होने के कारण तामसिक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पाती हैं और घर का वातावरण सकारात्‍मक बना रहता है।
दीपक
अग्नि ईश्वर का ही रूप है। दुर्गा मां की पूजा में शुद्ध देसी घी का अखंड दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त होती हैं एवं इससे आस-पास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। अखंड दीप को पूजा स्थल के आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व में रखना शुभ होता है क्योंकि यह दिशा अग्नितत्व का प्रतिनिधित्व करती है। आग्नेय कोण में अखंड ज्योति या दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है।
लाल गुड़हल का फूल
सुर्ख लाल रंग का यह पुष्प अति कोमल होने के साथ ही असीम शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। इसलिए लाल गुड़हल मां भगवती को अत्यंत प्रिय है। पौराणिक मान्यता है कि गुड़हल के पुष्प अर्पित करने से देवी प्रसन्न होकर भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं।
नारियल
नारियल के बाहरी आवरण को अहंकार का प्रतीक और आंतरिक भाग को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा के समक्ष नारियल को तोड़ने का तात्पर्य अहंकार को तोड़ना है। नवरात्रि पूजा में कलश के ऊपर नारियल पर लाल कपड़ा और मौली लपेटकर रखने का विधान है। माना जाता है कि इससे सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। वहीं नार‍ियल तोड़कर मां दुर्गा से अपने अहंकार को खत्‍म करने की प्रार्थना की जाती है।

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