बचकर रहें, दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू होता है खतरनाक

आजकल डेंगू ने अपने पांव खूब पसारे हुए हैं क्योंकि बरसात और बरसात के बाद के एक दो माह इस बुखार के लिए अनुकूल होते हैं। मादा एडिज इजिप्टी मच्छर को पनपने के लिए यह मौसम अति अनुकूल होता है। एडीज इजिप्टी मच्छर अधिक ऊंचाई तक नहीं उड़ सकता और अक्सर दिन में विशेषकर प्रात: समय में यह मच्छर काटता है। मच्छर काटने के बाद 3 से 10 दिन लग जाते हैं शरीर में बीमारी को पनपने में। डेंगू बुखार तीन दिन तरह का होता है- साधारण, डेंगू हैमरेजिक बुखार और डेंगू शॉक सिन्ड्रोम।
साधारण डेंगू बुखार जान के लिए खतरनाक नहीं होता और अपने आप ठीक हो जाता है मगर दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू खतरनाक होता है अगर समय पर इसका उचित इलाज न हो तो इसलिए इसके लिए लक्षणों के आधार पर पहचानना जरूरी है ताकि समय पर उचित इलाज कराया जा सके।
साधारण डेंगू बुखार
साधारण डेंगू बुखार ठंड लगकर तेज चढ़ता है। सिर, मांसपेशियां और जोड़ों में दर्द होता है। आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होता है। अगर आंख दबाएं या हिलाएं तो दर्द अधिक होता है। इसके अन्य लक्षण हैं कमजोरी महसूस होना,भूख न लगना, जी मिचलाना, मुंह का स्वाद खराब होना, गले में भी हल्के दर्द की शिकायत होना, शरीर पर लाल गुलाबी रंग के रैशेज होना। साधारणतया यह बुखार 5 से 7 दिन बाद ठीक हो जाता है, अधिकतर लोगों को इसी प्रकार का बुखार होता है।
डेंगू हेमरेजिक बुखार  
साधारण डेंगू में बुखार के लक्षणों के अलावा नाक और मसूड़ों से खून आता है ,उल्टी और शौच में भी खून आता है और त्वचा पर डार्क नीले रंग के छोटे बड़े रैशेज पड़ते हैं। डेंगू हेमरेजिक बुखार का पता ब्लड टेस्ट से पता चलता है।
डेंगू शॉक सिन्ड्रोम
साधारण और हेमरेजिक बुखार के लक्षणों के अलावा रोगी में शॅाक की अवस्था के कुछ लक्षण दिखाई देते हैं जैसे अधिक बेचैनी, बुखार तेज होने के साथ त्वचा का ठंडा महसूस होना। मरीज के होश धीरे-धीरे खोने लगते हैं और कभी-कभी नाड़ी तेज और कभी धीरे चलती है। ब्लड प्रेशर लो हो जाता है। इस प्रकार का डेंगू खतरनाक होता है। कभी कभी शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग फेल हो जाते हैं। सेल्स के अंदर मौजूद फ्लूइड बाहर निकलने लगता हैै पेट में पानी जमा हो जाता है। लंग्स और लिवर प्रभावित होते हैं जिनसे वे काम करना धीरे धीरे बंद कर देते हैं।
इलाज के लिए क्या करें
साधारण डेंगू बुखार का इलाज तो घर पर ही उचित देखभाल द्वारा किया जा सकता है। डाॅक्टर के परामर्श अनुसार दवा और डाइट लेनी चाहिए। अक्सर साधारण डेंगू में पैरासिटामोल से ही काम चल जाता है। डाॅक्टर एस्प्रिन लेने के लिए मना करते हैं क्योंकि एस्प्रिन लेने से प्लेटलेट्स गिर जाते हैैं। मरीज को पूरा आराम दें। 102 डिग्री बुखार से अधिक होने पर मरीज के शरीर पर पानी की पट्टी रखें। डेंगू हेमरेजिक और शॉक सिन्ड्रोम की अवस्था में तुरंत डाक्टर के पास ले जाएं। प्लेटलेट्स कम होने पर प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। प्लेटलेट्स की संख्या ब्लड टेस्ट होने से पता चलती है।
टेस्ट अवश्य कराएं 
तेज बुखार होने पर, जोड़ों में दर्द होने पर, त्वचा पर रैशेज होने पर पहले दिन ही टेस्ट करवा लें। अगर बुखार के अलावा और लक्षण नहीं हैं, बुखार तेज है और दो तीन दिन से कम नहीं हो रहा है तो फिजिशियन के पास जाएं और उसके परामर्श अनुसार टेस्ट करवाएं। इसका टेस्ट खाली पेट या भरे पेट दोनों अवस्थाओं में कराया जा सकता है। रिपोर्ट 24 घंटों मेें मिल जाती है। कई अच्छी लैब्स तीन चार घंटे के अंतराल में भी रिपोर्ट देती हैं। शुरू में एन एस 1 ब्लड टेस्ट कराया जाता है। तीन चार दिन के बाद अगर टेस्ट करवाएं तो एंटीबॉडी टेस्ट कराया जाता है। इसका ब्लड टेस्ट महंगा होता है।
परहेज
–    ठंडा पानी न पीएं , मैदे से बने खाद्य पदार्थों का सेवन भी न करें। खाना ताजा खाएं।
–    खाना बनाते समय हल्दी , अदरक,अजवायन का अधिक प्रयोग करें।
–    पानी खूब पीएं, उबला पानी लेना बेहतर है।
–    खाना हल्का और सुपाच्य लें। फूलगोभी, अरबी और साग का सेवन न करें।
–    मिर्च मसाले वाला भोजन न लें। भूख से कम खाएं। नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ का सेवन पानी के अतिरिक्त कर सकते हैं।
– नींद खूब लें।
–    विटामिन सी का सेवन अधिक करें। आंवले, नींबू, मौसमी का सेवन करें ताकि इम्यून सिस्टम ठीक रहे।
–    नाक के अंदर की तरफ सरसों का तेल लगाएं।
–    8-10 पत्ते तुलसी के एक गिलास पानी में खूब उबालें । आधा पानी रहने पर उसे रोगी को दें।
–    अपनी मर्जी से इलाज न करें।
–    मच्छरों के पैदा होने वाले स्थान को ढूंढें और उस पर मिट्टी का तेल डालें। कूलर,पौधों के गमलों में पानी भरा न रहे ध्यान रखें।
– दिन में खिड़की खोलें पर जाली वाला दरवाजा बंद रखें ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।
–    मच्छरों को भगाने के लिए मच्छरनाशक दवाओं , जैल, स्प्रे, मैट्स का प्रयोग करें। गुग्गल के धुएं से मच्छरों को भगाएं।
–    डेंगू वाले मरीज को मच्छरदानी में रखें ताकि मच्छर उसे काट कर अन्यों को बीमारी न दे सके।
बच्चों को पूरे बाजू और टांगों को ढकने वाले वस्त्र पहनाएं ताकि अधिक से अधिक शरीर का भाग ढका रह सके।

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