दक्षिणेश्वर काली मंदिर : 1872 में हाई कोर्ट में दायर हुआ था मामला

आज फिर जस्टिस सराफ के कोर्ट में मेंशन करेंगे
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : दक्षिणेश्वर काली मंदिर की चल अचल संपत्ति का इंतजाम और मंदिर की देखभाल को लेकर हुए विवाद के संदर्भ में हाई कोर्ट में 1872 में एक रिट दायर की गई । इन सवा सौ से अधिक सालों के दौरान मामला इस कोर्ट से उस कोर्ट में जाता रहा है और आदेश भी हुए हैं। पर बात जहां थी वही रह गई है। बुधवार को जस्टिस शेखर बी सराफ के कोर्ट में इसे मेंशन किया जाएगा।
एडवोकेट पंकज हालदार ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को इस मामले की सुनवायी जस्टिस रवि कृष्ण कपूर के कोर्ट में होनी थी पर उन्होंने इसे रिलीज कर दिया। अब डेटरमिनेशन के मुताबिक इसे जस्टिस सराफ के कोर्ट में बुधवार को मेंशन करेंगे। रानी रासमणि ने 1367 में एक अर्पणनामा तैयार किया था। इसमें कहा गया था कि उनके निधन के बाद उनके आठ नाती सेवायत की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके निधन के बाद उनके बड़े नाती ने 1872 में हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके मंदिर के प्रबंधन के लिए एक स्कीम बनाने का आदेश देने की अपील की थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने 1927 में एक गाइड लाइन बना दी थी। इसके बाद 1984 में हाई कोर्ट ने एक नयी स्कीम बना दी जिसके तहत चुनाव के जरिए सेवायतों का एक ट्रस्ट बॉडी बनाया जाना था। इसके बाद 2021 में फिर यह मामला हाई कोर्ट में आया। जस्टिस सराफ ने चुनाव के लिए पूर्व जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्या की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी थी। इसके बाद फिर जस्टिस कपूर के कोर्ट में अपील की गई तो मंगलवार को उन्होंने इसे वापस जस्टिस सराफ के पास भेज दिया।

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