क्यों कोरोना काल में आई रिश्तों में दरार

नई दिल्ली : कोरोना की दूसरी लहर ने न हमसे केवल हमारा स्वास्थ्य और सुख चैन छीना है, बल्कि शारीरिक के साथ ही मानसिक रूप से भी बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। यही वजह है कि कोरोना काल के दौरान यूपी में घरेलू हिंसा पांच गुना तक बढ़ गई। यह घरेलू हिंसा कई प्रकार के होते है जैसे शारीरिक, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक। घरेलू हिंसा के मामले में यूपी में लखनऊ नंबर वन पर है तो वाराणसी पांचवें पर।
बीएचयू आईआईटी में कंसलटेंट साइकोलॉजी एंड साइकोथेरेपिस्ट डॉक्टर लक्ष्मण ने बताया कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह शारीरिक के साथ ही मानसिक रूप से भी कितना असर डालेगा। अपने देश में शारीरिक परेशानियों पर तो बात होती है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य पर नहीं होती। अक्सर लोग मानसिक बीमारियों के लिए झाड़-फूंक और जादू टोने का सहारा ले लेते हैं जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
डॉक्टर लक्ष्मण कहते हैं कि यह मानसिक समस्या डिप्रेशन, एंग्जाइटी, ओसीडी, नींद की समस्या और पैनिक अटैक के रूप में देखी जा रही है। कोरोना काल में लोगों में डिप्रेशन 40 फीसद, एंग्जाइटी 30 से 35 और ओसीडी 20 से 25% तक बढ़ गया है। इसके अलावा यूपी में घरेलू हिंसा की घटनाएं 5 गुना तक बढ़ गई है। घरेलू हिंसा को हल करने के लिए बकायदा एक टीम बनाई गई है जो उत्तर प्रदेश के ज्यादातर शहरों में पहुंचने की कोशिश कर रही है।
डोमेस्टिक वायलेंस कई प्रकार के होते हैं, शारीरिक, मानसिक और आर्थिक। डॉक्टर लक्ष्मण कहते हैं कि यह तमाम हिंसा हमारे मन पर बहुत ज्यादा नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। लॉकडाउन के दौरान बहुत लोगों ने अपनों को खोया, कई लोगों की नौकरी चली गई और भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बहुत लोगों को कोरोना हुआ। ऐसे में लोग घबरा गए हैं और डोमेस्टिक वायलेंस बढ़ता गया।
डॉ. लक्ष्मण के मुताबिक लगभग 1000 लोगों का डेटा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से जुटाया गया और इसमें देखा गया कि कौन-कौन से शहर सबसे ज्यादा डोमेस्टिक वायलेंस से कोरोना काल के दौरान प्रभावित हुए हैं। डोमेस्टिक वायलेंस केस में लखनऊ सबसे ऊपर रहा जहां 120 केस आए।
इसके बाद कानपुर से 104-105 केस आये। मेरठ तीसरे नंबर पर था जहां 87 केस दर्ज हुए हैं। बरेली में 80, फिर आगरा में 73-75 और 60-65 केस के साथ बनारस पांचवें नंबर पर रहा। इसके अलावा गोरखपुर में 50 से 55, प्रयागराज में 40 के आसपास जबकि मुरादाबाद में घरेलू हिंसा के सबसे कम 30 से 35 के केस सामने आए।
यह तो शहर की बात हो गई लेकिन गांव के लोगों को मेंटल हेल्थ बारे में कुछ पता ही नहीं है। जिस तरह से कोरोना के लिए तमाम हेल्थ सेंटर बनाए गए हैं उसी तरह मानसिक बीमारियों से लड़ने के लिए भी मेंटल हेल्थ सेंटर बनाए जाने चाहिए।

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