कोवैक्सीन, कोविशील्ड या स्पुतनिक : कौन कितनी असरदार

नई दिल्ली : देशभर में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है जहां देश कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है तो वहीं लोग वैक्सीनेशन करवाकर इसे मात भी दे रहे हैं। फिलहाल देश में लोगों को दो वैक्सीन लगाई जा रही है। अब देश को कोरोना वारयस के खिलाफ कोविशील्ड और कोवैक्सीन के अलावा स्पुतनिक-वी वैक्सीन मिल गई है। रूस द्वारा तैयार की गई स्पुतनिक-वी वैक्सीन की कुछ डोज भारत में 1 मई को ही आ गई थी।
इन वैक्सीन की प्रभावी दर, इम्यूनिटी बनाने की क्षमता और साइड इफेक्ट से हटकर देखा जाए तो कोरोना वायरस के खिलाफ ये तीनों वैक्सीन बेहद कारगर साबित हुई हैं।
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने रूस में किए गए परीक्षणों के आधार पर स्पुतनिक-वी वैक्सीन के इमरजेंसी यूज की मंजूरी दे दी है। इस परीक्षण में स्पुतनिक वी की एफिकेसी रेट 91.6% दर्ज की गई और कोरोना से लड़ाई के खिलाफ यह वैक्सीन कारगर सिद्ध हुई। इसकी तुलना में भारत की कोवैक्सीन, जिसे हाल ही में यूके के ज्यादा संक्रामक माने जा रहे कोरोना वैरिएंट के खिलाफ असरदार पाया गया है। इसका एफिकेसी रेट 81% से अधिक पाया गया जबकि विश्व स्तर पर इस्तेमाल की जा रही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविशील्ड का एफिकेसी रेट 70.4% से अधिक दर्ज किया गया, जिसे दो डोज के बीच अंतराल बढ़ाकर 90% तक लाया जा सकता है।
हालांकि, वैक्सीन लगने के बाद सामान्य बुखार, दर्द, थकान जैसे आम साइड इफेक्ट हो सकते हैं। लेकिन इससे कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है। इनमें से ज्यादातर के साइड इफेक्ट कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग-अलग भी हो सकते हैं। इसके अलावा यह साइड इफेक्ट्स अलग-अलग वैक्सीन के नेचर पर भी निर्भर करते हैं।
रूस के गामलेया नेशनल सेंटर ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी, द्वारा विकसित कोरोना वायरस के खिलाफ स्पुतनिक वी उन पंजीकृत वैक्सीन में से एक है जिन्हें विश्व स्तर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी शुरुआती दौर में ही मिल गई थी। स्पुतनिक वी एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है जो एंटीबॉडी के उत्पादन को ट्रिगर करके काम करती है इसलिए इसके परिणाम स्वरूप शरीर में इन्फ्लेमेशन समेत हल्के-फुल्के साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं।
फरवरी 2021 में प्रकाशित एक लैंसेट अध्ययन के अनुसार, वैक्सीन लगने के बाद थकान, सिरदर्द, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या फिर फ्लू जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। पर अभी तक इसका कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है। मेडिकल स्टडीज के अनुसार, लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, हेमरेज स्ट्रोक और थ्रोम्बोसिस से जूझ रहे लोगों में ऐसी गंभीर समस्याएं देखने को मिली हैं पर इसका संबंध वैक्सीन से नहीं पाया गया।
हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित और निर्मित कोवैक्सीन, इम्यून सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए एक निष्क्रिय SARS-COV-2 एंटीजन स्ट्रेन (या मृत वायरस) का उपयोग करता है, जो कोरोना वायरस के संक्रमण को पहचानकर इससे लड़ने में मदद करेगा। चूंकि इसे पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है। इसलिए इसे Moderna और Pfizer shots जैसी एमआरएनए वैक्सीन की तुलना में उपयोग के लिए काफी हद तक सुरक्षित माना जाता है। इसके साइड इफेक्ट भी कम होते हैं।
कोवैक्सीन फैक्ट शीट और रेगुलेट्री गाइडलाइंस के अनुसार, इनॉक्यूलेशन राउंड के बाद लोगों में सूजन, इंजेक्शन की जगह पर दर्द, बुखार, पसीना आना या ठंड लगना, शरीर में दर्द, जुकाम, उल्टी, खुजली, चकत्ते, सिरदर्द जैसे लक्षण देखने को मिले। इस समय जो लोग ब्लीडिंग डिसऑर्डर, वीक इम्यूनिटी, ब्लड थिनर का उपयोग करने वाले, गर्भवती, ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाएं या किसी भी एलर्जी से ग्रसित हैं, उन्हें अभी वैक्सीन ना लेने की सलाह दी गई है।
कोविशील्ड- दुनियाभर में 62 से अधिक देशों में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस कोविड वैक्सीन में ब्लड क्लॉट्स की समस्या के साथ-साथ कई अन्य साइड इफेक्ट्स भी सामने आए हैं। पर कई स्टडीज में इस कोविशील्ड वैक्सीन को उपयोग के लिए सुरक्षित साबित किया है। कोविशील्ड जैब के साइड-इफेक्ट्स कोवैक्सीन के समान पाए गए हैं, जैसे लालपन, बदन दर्द, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, हल्का या तेज बुखार, सुस्ती व थकान, मांसपेशियों में जकड़न आदि। हालांकि, इन साइड इफेक्ट्स की इंटेन्सिटी थोड़ी ज्यादा हो सकती है।
सभी वैक्सीन के लाभ और साइड इफेक्ट्स की जानकारी लेने के बाद लोग सेंटर पर वैक्सीन की उपलब्धता के आधार पर फैसला कर सकते हैं। पर यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी वैक्सीन अप्रूव्ड होने के साथ सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं और कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में लगभग समान रूप से प्रभावी हैं। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि जब भी उन्हें वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए, वे वैक्सीन शॉट ले लें।

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