केंद्रीय टीम का बंगाल को कड़ा पत्र : हमें नहीं किया गया सहयोग

स्वास्थ्य परिसेवा पर जतायी असंतुष्टि

लॉकडाउन को और सख्ती से बरतते का सुझाव

टीम की सुरक्षा पर भी उठाया सवाल

केंद्री की नाराजगी इस पर भी

* राज्य सरकार को 4 पत्र दिया मगर जवाब एक का भी नहीं मिला

* स्वास्थ्य के वरिष्ठ अधिकारी का साथ मांगा था मगर जूनियर रैंक के अधिकारी को भेजा गया

* पुलिस की तरफ से नहीं भेजा गया अधिकारी, बीएसएफ ही रहा भरोसा

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोरोना का हाल जाने कोलकाता समेत यहां के 7 जिलों के दौरे पर आयी केंद्रीय टीम की तरफ से राज्य सरकार को दो कड़ा पत्र दिया गया है। पत्रों के माध्यम से राज्य सरकार पर उन्हें सहयोग नहीं करने की बात कही गयी है। पत्र के जरिये कहा गया है कि राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा का यह कहना कि केंद्रीय टीम का जहां मन वहां जा सकती है। उन्हें हमने नहीं बुलाया है, यह कहना गृह मंत्रालय के निर्देशों का उल्लंघन करना है। राज्य सरकार ने एक भी चिट्ठी का जवाब तक नहीं दिया। इसके साथ ही राज्य में स्वास्थ्य परिसेवा पर भी सवाल उठाया है। अपूर्व चंद्रा के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार को हावड़ा के सलकिया, डुमुरजुला स्टेडियम और संजीवनी कोविड अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है। केंद्र की दूसरी टीम उत्तर बंगाल के तीन जिलों के दौरे पर है। जानकारी के अनुसार यहां उस महिला के घर भी टीम गयी थी जो कोरोना के कारण मरी है। इस टीम ने राज्य सरकार को लॉकडाउन का और सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

उत्तर बंगाल में सख्ती से हो लॉकडाउन

उत्तर बंगाल दौरे पर आयी टीम का नेतृत्व कर रहे विनीत जोशी ने अपने पत्र में कहा है कि तत्काल कदम के तौर पर यह सुझाव दिया जाता है कि महामारी को और आगे फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन का और सख्ती से पालन होना जरूरी है। हालत पर नजर रखने और सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदम कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं, इन बातों की जानकारी देने के लिए और फील्ड अधिकारियों को तैनात करने की जरूरत है। उन्होंने सिलिगुडी के पुलिस आयुक्त के साथ बैठक की भी मांग की ताकि उत्तर बंगाल में कोविड-19 से निपटने के लिए राज्य की तैयारियों के बारे में सूचना जुटाई जा सके।

हॉटस्पॉट हावड़ा को लेकर सेंट्रल टीम के सवाल

क्वारंटाइन सेंटर बना डुमुरजुला स्टेडियम में सोशल डिस्टेंसिंग का नामोनिशान नहीं है। यहां 80 लोगों को रखा गया है। कोरोना संदिग्धों को 7 दिन रखने के बाद उनका टेस्ट कराया जा रहा है और जांच रिपोर्ट आने में करीब 4 दिनों का वक्त लग रहा है। सलकिया में सर्वे अच्छे से करने की जररूत है। एक महीने के लॉकडाउन में यहां क्या किया गया इसकी जानकारी मांगी गयी है। संजीवनी अस्पताल में भी स्वास्थ्य परिसेवा को लेकर टीम ने असंतोष जाहिर किया है।

मरकज से लौटेने वालों की​ विस्तृत रिपोर्ट

केंद्रीय टीम ने मरकज से राज्य में लौटे लोगों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्हें कहां क्वारंटाइन में रखा गया। कितने की जांच की गयी। कितनों की रिपोर्ट पॉजिटिव या नेगेटिव हैं। यहां आकर उनका संपर्क कहां-कहां और किसके साथ हुआ था। सब रिपोर्ट में होना चाहिए।

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