सावधानी बरतकर दमा पर करें काबू

दमा, एज्मा (दमा) किसी भी आयु में किसी को भी हो सकता है। सावधानी बरत कर इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। एज्मा के कारण हैं पशुओं के खाल व बाल, धुआं, धूल, बिस्तर, तकिया व झाड़ू में चिपके कण, तीव्र गंध, स्प्रे फूलों के परागकण, कठोर मेहनत आदि। इनसे बचकर दमा के दौरों को टाला जा सकता है। सांस नली पर इस तरह के कण चिपकने पर सांस लेने व छोड़ने की गति प्रभावित होती है जिसे निकालने के लिए छीकें आती हैं, अतएव ऐसी चीजों से बचने पर सांस की स्वाभाविक क्रिया सुचारु चलती रहेगी और दमा का दौरा नहीं पड़ेगा।

बीजों के जेनेटिक बदलाव से फसलों को खतरा

कम समय में अधिक फसल प्राप्त करने के उद्देश्य से खाद्य पदार्थों के बीजों के गुण सूत्रों (जीन) में तरह-तरह का बदलाव किया जा रहा है। ये नवविकसित बीज अपने साथ कई मुसीबतें भी दे रहे हैं। कीट एवं वायरसों की नई प्रजातियां सामने आ रही हैं जो अन्य पौधों एवं फसलों के लिए आफत है। यह आफत विज्ञान की उन्नति का लाभ लेते जेनेटिक बदलाव कर तैयार नवीन बीजों की देन है। यदि यह प्रयोग अंधाधुंध चलता रहेगा तो कई फसलें एवं दुर्लभ पौधों को नए कीट एवं बैक्टीरिया चौपट कर जायेंगे। जेनेटिक बदलाव से प्राप्त नए बीज का यह खतरनाक प्रतिफल है। दूरगामी प्रभाव से पूर्व सचेत हो जाना चाहिए।

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