महापर्व छठ का पहला अर्घ्य आज, यहां पढ़ें सामग्री लिस्ट, पूजा विधि और मुहूर्त

कोलकाताः छठ पर्व हर साल कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। ये तिथि इस बार 10 नवंबर को पड़ रही है। मुख्य रूप से इस पर्व को बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस पर्व में 36 घंटे निर्जला व्रत रख सूर्य देव और छठी मैया की पूजा और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता है छठ पूजा करने से हर मनोकामना पूर्ण होती हैं। खासकर इस व्रत को संतानों के लिए रखा जाता है। कहते हैं जो लोग संतान सुख से वंचित हैं उनके लिए ये व्रत वरदान साबित होता है। जानिए छठ पर्व की पूजा विधि, सामग्री, प्रसाद, कथा और आरती।
छठ पूजा: संध्या अर्घ्य और प्रात:काल के अर्घ्य का समय
10 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय : 05:30 PM
11 नवंबर (प्रात:काल अर्घ्य) सूर्योदय का समय : 05:29 AM

छठ पूजा सामग्री:

नए वस्त्र, बांस की दो बड़ी टोकरी या सूप, थाली, पत्ते लगे गन्ने, बांस या फिर पीतल के सूप, दूध, जल, गिलास, चावल, सिंदूर, दीपक, धूप, लोटा, पानी वाला नारियल, अदरक का हरा पौधा, नाशपाती, शकरकंदी, हल्दी, मूली, मीठा नींबू, शरीफा, केला, कुमकुम, चंदन, सुथनी, पान, सुपारी, शहद, अगरबत्ती, धूप बत्ती, कपूर, मिठाई, गुड़, चावल का आटा, गेहूं।
छठ पूजा विधि:
-छठ पर्व के दिन प्रात:काल स्नानादि के बाद संकल्प लिया जाता है। संकल्प लेते समय इस मन्त्र का उच्चारण किया जाता है-
ॐ अद्य अमुक गोत्रो अमुक नामाहं मम सर्व पापनक्षयपूर्वक शरीरारोग्यार्थ श्री सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।
-पूरे दिन निराहार और निर्जला व्रत रखा जाता है। फिर शाम के समय नदी या तालाब में जाकर स्नान किया जाता है और सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है।
-अर्घ्य देने के लिए बांस की तीन बड़ी टोकरी या बांस या पीतल के तीन सूप लें। इनमें चावल, दीपक, लाल सिंदूर, गन्ना, हल्दी, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी रखें। साथ में थाली, दूध और गिलास ले लें। फलों में नाशपाती, शहद, पान, बड़ा नींबू, सुपारी, कैराव, कपूर, मिठाई और चंदन रखें। इसमें ठेकुआ, मालपुआ, खीर, सूजी का हलवा, पूरी, चावल से बने लड्डू भी रखें। सभी सामग्रियां टोकरी में सजा लें। सूर्य को अर्घ्य देते समय सारा प्रसाद सूप में रखें और सूप में एक दीपक भी जला लें। इसके बाद नदी में उतर कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें।
ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥
छठ पूजा का महत्व: इस पर्व में सूर्य देव की पूजा की जाती है उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य देव के साथ-साथ छठी मैया की भी पूजा होती है। मान्यता है कि छठी मैया संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं। पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए ये पर्व मनाया जाता है।

 

शेयर करें

मुख्य समाचार

राम अवतार गुप्त प्रोत्साहन, ऐसे करें आवेदन

" हमारा सपना हर छात्र माने हिंदी को अपना" हर साल की तरह इस साल भी हम लेकर आये हैं राम अवतार गुप्त प्रोत्साहन। इस बार आगे पढ़ें »

कोविड से ठीक हो चुके लोगों को ओमिक्रॉन से कितना खतरा? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के सबसे खतरनाक माने आगे पढ़ें »

विक्की कौशल ने बताया, कैसी पत्नी चाहते हैं वे? सुनकर कैटरीना के फैन्स हो जायेंगे खुश

…और गोवा में तृणमूल को मिल गया साथ

सर्दियों में सेक्स क्यों है ज्यादा मजेदार, जानें?

सिहरन पैदा करनेवाली ऑनर किलिंग : महाराष्ट्र के औरंगाबाद में गर्भवती बहन का सिर धड़ से किया अलग, फिर भाई पहुंचा थाने

गर्भ में ही 7 महीने का बच्चा खो चुकीं बिंदू, इस हादसे के बाद दोबारा कभी मां नहीं बन…

आईसीसी रैंकिंग में नंबर-1 बना भारत

नागालैंड की घटना पर एक्शन में सेना, जांच के लिए गठित की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी

विक्की-कटरीना आज जायेंगे राजस्थान, मुंबई में हो सकती है रजिस्टर्ड मैरिज

तृणमूल सांसद नहीं गये नागालैंड

ऊपर