भोजन व जीवनशैली में परिवर्तन से कम होती है कैंसर की संभावना

विशेषज्ञों के अनुसार भोजन और जीवनशैली में परिवर्तन लाकर व्यक्ति कैंसर की संभावना को 30-40 प्रतिशत कम कर सकता है। हार्वर्ड में हुए एक शोध के अनुसार शरीर में वसा का अ​धिक हो जाना भी कैंसर का एक कारण है, क्योंकि वसा के उतक एस्ट्रोजन और इंसुलिन पैदा करते हैं, जो ट्यूमर के बढ़ने का कारण बनता है, इसलिए अधिक तैलीय व वसायुक्त भोजन का सेवन न करें क्योंकि ये लीवर, स्तन, कोलोन और पैनक्रियास के कैंसर की संभावना को बढ़ाते हैं। अगर वसा का सेवन कर भी रहे हैं तो केवल असंतृप्त वसा का सेवन ही करें। धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन भी न करें। धूम्रपान फेफड़ों व मुंह के कैंसर का मुख्य कारण है। अल्कोहल का अधिक सेवन बड़ी आंत, जिगर व पैनक्रियास के कैंसर की संभावना को बढ़ाता है। नियमित व्यायाम स्तन कैंसर व बड़ी आंत के कैंसर की संभावना को कम करता है। फलों व सब्जियों का सेवन अधिक करें क्योंकि इनमें ऐसे तत्व पाये जाते हैं, जो कैंसर से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
निराशा उच्च रक्तचाप की संभावना को बढ़ाती है

फिनलैण्ड के विशेषज्ञों द्वारा किये गये शोध के अनुसार जो व्यक्ति निराशावादी होते हैं, उन्हें आशावादी व्यक्तियों की तुलना में उच्च रक्तचाप होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। इस शोध के प्रमुख शोधकर्ताओं के अनुसार यह पहला शोध है, जिसमें निराशा व हाइपरटेंशन के बीच संबंध को जानने की कोशिश की गयी है। शोध पूर्वी फिनलैंण्ड के कुछ व्यक्तियों पर किया गया और पाया गया कि जिन व्यक्तियों में निराशा का स्तर सबसे अधिक पाया गया, उन्हें उच्च रक्तचाप होने की संभावना सबसे अधिक रही। निराशा के अतिरिक्त उच्च रक्तचाप के अन्य कारणों में धूम्रपान, अल्कोहल, शारीरिक श्रम का अभाव व वंशानुगत कारण आदि प्रमुख हैं। इस शोध से यह भी पता चला है कि डिप्रेशन से भी अधिक बुरा प्रभाव हृदय पर निराशा का पड़ता है। यही नहीं, निराशा डिप्रेशन का भी प्रमुख कारण है इसलिए हृदय की सुरक्षा के लिये आशावादी होना बहुत आवश्यक है।
माता-पिता भी बच्चों को देते हैं धूम्रपान की प्रवृत्ति

विशेषज्ञों के अनुसार टीन एजर्स में धूम्रपान की प्रवृत्ति का एक कारण अभिभावक भी हैं। अगर माता-पिता में से कोई धूम्रपान करता है या दोनों धूम्रपान करते हैं तो बच्चे की धूम्रपान करने की संभावना बढ़ जाती है। यही नहीं, अगर बच्चे अपने बड़े भाई या बहन को भी सिगरेट पीते हुए देखते हैं तो भी उनमें इसकी आदत पड़ने की संभावना बढ़ती है। घर में अगर बच्चे को आसानी से सिगरेट पड़ी मिलती है तो उसे एसे चोरी-चोरी पीने की भी जरूरत नहीं पड़ती। शोधों से यह भी पता चला है कि धूम्रपान करने वाले अभिभावकों के बच्चों को ब्रोंकाइटिस, न्यूमोनिया और फेफड़ों संबंधी रोग अधिक रहते हैं इसलिए आप सिगरेट का सेवन करते हैं और अगर इस बुरी लत को छोड़ नहीं सकते तो कम से कम बच्चों के सामने सिगरेट न पीएं और न ही सिगरेट आदि खुले रखें। बच्चों को भी प्रारंभ से ही धूम्रपान के हानिकारक प्रभाव के बारे में बताते रहें ताकि वे इस बुरी लत का शिकार न बन पाएं।

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