चैत्र नवरात्रिः ऐसे करें देवी शैलपुत्री को प्रसन्न

कोलकाताः चैत्र नवरात्रि आज से शुरू हो गई है और इसकी समाप्ती 21 अप्रैल को होगी। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। ये नौ स्वरूप अलग-अलग शक्तियों की प्रतीक हैं। नौ दिन तक चलने वाले इस पावन पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और माता का विशेष आशीर्वाद पाते है। अगर आप भी इस नवरात्रि अपनी मनोकामना को पूर्ण करना चाहते हैं तो नौ दिनों तक मातारानी को अलग-अलग स्वरूपों के हिसाब से उनकी पूजा व जाप करें ताकि माता प्रसन्न होकर आप पर अपनी दया दृष्टि बनाए रखे।

नौ दिन माता के इन रूपों की होती पूजा

नवरात्रि में माँ भवानी को प्रसन्न करने के लिए उनके नौ रूपों की शुभ तिथि की अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग शक्ति स्वरूप हैं- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि।

प्रथम दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा

पहले दिन चैत्र प्रतिपदा पर मां शैलपुत्री की विधिवत पूजा की जाती है। शैलराज हिमालय के घर मे जन्म लेने की वजह से माता का नाम शैलपुत्री पड़ा। माता शैलपुत्री बैल पर सवार रहती हैं। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल होता हैं। यह त्रिशूल जहां भक्तों को अभयदान देता है, वहीं पापियों का विनाश करता है। वही बाएं हाथ में कमल का पुष्प ज्ञान और शांति का प्रतीक है। माता की पूजा सच्चे श्रद्धा भाव से उनको अक्षत्, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प आदि अर्पित करते हुए करें। इसके बाद माता के मंत्र का उच्चारण करें-

शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी।

पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी,रत्नयुक्त कल्याण कारीनी।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:।।

अंत में कपूर या घी के दीये जलाकर माता की आरती उतारें और शंखनाद करें।

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