केंद्रीय टीम और बंगाल की टीम में क्यों हो रही मुक्का-लात?

कोलकाता : चाइनीज वायरस कोरोना का कहर बंगाल में बढ़ता जा रहा है। राज्य के 7 जिलों में कोरोना की जमीनी हकीकत देखने के लिए केंद्र सरकार ने बंगाल में टीम भेजी है। केंद्र की टीम का नेतृत्व कर रहे अपूर्व चंद्र का कहना है कि राज्य इस मामले में हमें सहयोग नहीं कर रहा है। इस बीच केंद्रीय दल से मुलाकात करने मुख्य सचिव राजीव सिन्हा बीएसएफ गेस्ट हाउस पहुंचे। एक दिन पहले ही यह टीम कोलकाता पहुंची है, जबकि राज्य को इस बात पर एतराज है कि बगैर बताए टीम इलाके में आयी क्यों है ? आज की बैठक काफी मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद ही तय होगा कि केंद्रीय टीम का अगला कदम कितना कठाेर हो सकता है।

आखिर इतनी खींचतान क्यों? 

राज्य सरकार का मकसद जहां चाइनीज वायरस के प्रसार पर लगाम लगाना है, वहीं केंद्रीय टीम का उद्देश्य भी यही है कि राज्य में कोरोना पर जल्द से जल्द कैसे काबू पाया जाए, इसकी रणनीति बनाई जाए। लेकिन फिर भी दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी है। आम आदमी समझ नहीं पा रहा कि जब दोनों का मकसद एक ही नतीजे पर पहुंचना है तो वे मिलकर काम क्यों नहीं कर पा रहे। बताते चलें कि बंगाल के 7 जिलों को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष रूप से गंभीर की श्रेणी में डाला है। इस श्रेणी में कोलकाता, हावड़ा के साथ-साथ देश में सबसे खराब हालत से गुजर रही मुंबई और मध्य प्रदेश का वुहान बन चुका इंदौर भी शामिल है।

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