धार्मिक प्रताड़ना झेल रहे लोगों के हित में है विधेयक, विपक्ष बोल रहा पाकिस्तान की भाषा- मोदी

नयी दिल्ली : नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को लोकसभा में मंजूूरी मिल जाने के बाद बुधवार को राज्यसभा में पेश किया गया जिसपर चर्चा हो रही। इसके पूर्व विधेयक पर चर्चा के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दल की संसद में बैठक हुई। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बैठक के बाद कहा, ‘‘मोदी का कहना है कि धार्मिक प्रताड़ना झेल रहे लोगों के लिए यह विधेयक सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। इस विधेयक के खिलाफ ‌विपक्षी दल पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा है कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्र के किसानों और कारोबारियों से इस विधेयक पर अपने विचार रखने के लिए कहें और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष इन प्राप्त सुझावों को रखें।’’

विधेयक सरकार का आपराधिक हमला है

नागरिकता संशोधन विधेयक के मुद्दे पर राहुल गांधी ने लिखा, ‘‘यह विधेयक एक आपराधिक हमला है जो कि सरकार पूर्वोत्तर के लोगों, उनकी जीवनशैली और भारत के विचार पर कर रही है।’ वहीं, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि, ‘‘जो राजनीतिक दल संघ और भाजपा की विचारधारा के ‌विरोधी हैं, राज्यसभा में नागरिकता विधेयक पर उनकी प्रतिक्रिया देखना दिलचस्प होगा। विधेयक पर बहस के दौरान सदन से वॉकआउट कर जाना मोदी सरकार को समर्थन देने का सबसे सहज तरीका है। अगर नीतीशजी और रामविलासजी लोहिया की विचारधारा के समर्थक हैं तो जरा विचार कीजिए।

भारतीय मुस्लिमों को विधेयक से कोई लेना-देना नहीं

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन ‌विधेयक को करीब 14 घंटे की बहस के साथ ही लोकसभा में मंजूरी मिल गई थी। लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 मतदान दर्ज किए गए। इसे लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में मंगलवार को कई स्‍थानों पर उग्र विरोध प्रदर्शन देखा गया। विधेयक के विरोध में कांग्रेस बुधवार को देशभर में प्रदर्शन करेगी। अपनी राज्य इकाइयों को कांग्रेस ने पार्टी के मुख्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के लिए कहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक धार्मिक भेदभाव करने वाला है। वहीं, देश के गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक को धार्मिक प्रताड़नाओं से मुक्ति का दस्तावेज बताया है। उनके अनुसार भारतीय मुसलमानों को इस विधेयक से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह विधेयक सिर्फ उन अल्पसंख्यकों के लिए जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना झेलने के कारण भारत आ गए हैं। उन्होंने कहा कि ये देश इस्लामिक देश हैं इसलिए इन देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं। बता दें कि मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में भी इस ‌विधेयक को लोकसभा में मंजूरी मिल गई थी लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के विरोध के कारण यह पारित नहीं हो सका था।

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