राजग सरकार में बिहार का बजट आठ गुना बढ़ा : सुशील मोदी

Sushil Modi statement about Narco Test

पटना : बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में राज्य के विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर होने का दावा करते हुए शुक्रवार को कहा कि पहली बार राजग सरकार बनने से लेकर अब तक प्रदेश के बजट में आठ गुना की वृद्धि हुई है।
सुशील मोदी ने विधानसभा में आय-व्यय 2020-21 पर हुए विमर्श के बाद सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के निधन के बाद करीब 30 वर्षों तक बिहार का विकास बाधित रहा। वित्त वर्ष 1960-61 से 1990 के बीच बिहार में 23 मुख्यमंत्री बने। कर्पूरी ठाकुर के अल्प कार्यकाल के बाद 1990 से 2005 तक के 15 वर्षों के दौरान भी बिहार विकास से वंचित रहा। उन्होंने कहा कि नवम्बर 2005 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी तो बिहार एक बार फिर तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर हुआ। वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2004-05 में बिहार का बजट 23885 करोड़ रुपये का था, जो 2019-20 में आठ गुना वृद्धि के साथ 2 लाख 501 करोड़ रुपये तथा 2020-21 में 2 लाख 11 हजार 761 करोड़ रुपये का हो गया है। मोदी ने बताया कि वित्त वर्ष 1990-91 से 2004-05 तक वर्तमान मूल्यों पर बिहार की विकास दर मात्र 9 प्रतिशत रही, जबकि राजग की सरकार में अब यह 18.9 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि राजद-कांग्रेस के 15 वर्षों के कार्यकाल में स्थिर मूल्यों पर विकास दर 4.5 प्रतिशत थी, जबकि राजग की सरकार के दौरान यह 10 प्रतिशत से अधिक है। वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 1990-91 में प्रति व्यक्ति आय 3037 तथा 2004-05 में 8000 थी, जबकि 2018-19 में यह करीब छह गुना बढ़कर 43822 रुपये हो गयी है। उन्होंने बताया कि 1990-91 में पूंजीगत व्यय मात्र 1140 करोड़ रुपये तथा 2004-05 में 3340 करोड़ रुपये था, जो 2018-19 में बढ़कर 21058 करोड़ रुपये हो गया है। 1990-91 में राज्यकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत और 2004-05 में 6.2 प्रतिशत जबकि 2019-20 में मात्र 2.7 प्रतिशत रहा।
मोदी ने बताया कि वित्त वर्ष 1990-91 से 2005-06 तक के 15 वर्षों में कुल खर्च 2 लाख 15 हजार करोड़ रुपये हुआ, जबकि राजग सरकार के 14 वर्षों के कार्यकाल में यह राशि बढ़कर 12 लाख 24 हजार करोड़ हो गयी है। उन्होंने बताया कि 2005-06 में योजना व्यय कुल बजट का मात्र 21 प्रतिशत तथा गैर योजना व्यय 78 प्रतिशत था जबकि 2020-21 में योजना व्यय 49.5 प्रतिशत और गैर योजना व्यय 50 प्रतिशत प्रस्तावित है। वित्त मंत्री ने कहा कि राजग सरकार के कार्यकाल में बिहार को लगातर पांच बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला। वित्त वर्ष 2005-06 में चावल का उत्पादन 34.96 लाख मैट्रिक टन था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 61.55 लाख मैट्रिक टन हो गया। चावल की उत्पादकता 10.75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 19.48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया। मोदी ने बताया कि इसी अवधि में गेहूं का उत्पादन 27.63 लाख मैट्रिक टन से बढ़कर 2018-19 में 64.66 लाख मैट्रिक टन और उत्पादकता 13.79 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 29.98 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया। मक्का का उत्पादन 14.05 लाख मैट्रिक टन था, जो 2018-19 में बढ़कर 32.37 लाख मैट्रिक टन हो गया। 2005-06 में सब्जी का उत्पादन 76.54 लाख मैट्रिक टन था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 167.64 लाख मैट्रिक टन हो गया है। बिहार सब्जी उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। वित्त मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित एक लाख 25 हजार करोड़ रुपये के बिहार पैकेज के तहत 53 हजार करोड़ रुपये की योजना सड़क प्रक्षेत्र में कार्यान्वित की जा रही है। इस पैकेज के तहत कुल 75 योजनाओं का चयन किया गया है, जिनमें से 12 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं तथा 40 योजनाओं की निविदा की प्रक्रिया प्रगति पर है। अन्य योजनाएं स्वीकृति, निविदा या विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की प्रक्रिया में है।

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