धर्म में विश्वास होने से आयु लम्बी होती है

वैज्ञानिक भी अब इस बात को मानते हैं कि धर्म न केवल हमारी आत्मा की शुद्धि करता है बल्कि हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार जो व्यक्ति धार्मिक स्थलों आदि नियमित जाते हैं वे अधिक आयु जीते हैं। यह शोध 126,000 लोगों पर किया गया और इस शोध के अनुसार जो व्यक्ति चर्च, मन्दिर, नियमित जाते थे, वे इन जगहों पर न जाने वाले व्यक्तियों की तुलना में अधिक उम्र जीये।विशेषज्ञों ने इस बात का अध्ययन किया कि ऐसी जगहों में जाने से किस कारण से उम्र का यह परिवर्तन हुआ। क्या धर्म और आयु का कोई संबंध है और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इन जगहों पर जाने से व्यक्ति का जीने का ढंग स्वस्थ होता है। उसे अपने मित्रों से, अपने रिश्तेदारों से अधिक सामाजिक सहारा मिलता है। उसमें विश्वास, दृढ़ता आती है जिसके कारण वह बीमारियों से लड़ना सीखता है और यह विश्वास ही उसकी विजय निश्चित करता है।
जिंक की कमी से पैदा होती हैं स्वास्थ्य समस्याएं

फ्रैंकफर्ट में जर्मन हेल्थ एसोसिएशन द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार आधे से अधिक जर्मन जिंक की कमी से पीड़ित हैं। जिंक की कमी से जुकाम, थकावट, भूख न लगना, घावों का धीमी गति से भरना आदि समस्याएं उत्पन्न होती हैं और अगर इन समस्याओं को गंभीरता से न लिया जाए तो हमारा रोग प्रतिरोधक सिस्टम कमजोर हो सकता है। बालों का झड़ना व त्वचा संबंधी रोग भी हो सकते हैं। जर्मन हेल्थ एसोसिएशन के अनुसार 8 साल की उम्र के बच्चे को प्रतिदिन 15 मिलीग्राम जिंक की आवश्यकता होती है और एक गर्भवती महिला या बच्चे को अपना दूध पिलाने वाली महिला को 20 से 25 मिलीग्राम जिंक की आवश्यकता होती है। जिंक के अच्छे स्रोत हैं-पनीर आदि।

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