पीठ दर्द से बचाव आवश्यक है

पीठ दर्द सिर्फ वृद्धावस्था का ही दर्द नहीं है बल्कि यह किसी भी उम्र में होने वाली तकलीफदेह बीमारी है। आज की बदलती जीवन शैली के कारण पीठ या कमर दर्द की समस्या आम बनती जा रही है। महिलाओं में मासिक एवं गर्भावस्था के दौरान कमर दर्द की शिकायत अधिक देखी जाती है। कैल्शियम, विटामिन की कमी, रूमेटायड आर्थराइटिस, कशेरूकाओं की बीमारी, मांसपेशियों एवं तन्तुओं में खिंचाव, गर्भाशय में सूजन, मासिक में गड़बड़ी, गलत आसनों के प्रयोग आदि अनेक कारणों से पीठ या कमर में दर्द हो जाता है।
मानसिक तनाव कमर के दर्द को बढ़ा देता है। कभी-कभी मानसिक तनाव के कारण भी कमर में दर्द शुरू हो जाता है। दर्द सिर्फ कमर में ही नहीं होता बल्कि अन्य विभिन्न स्थानों पर भी शुरू हो सकता है।
कंधे के आस-पास होने वाले दर्द को ‘शोल्डर पेन’ कहा जाता है। यह दर्द प्राय: झुककर या गलत तरीके से काम करने, कंधे की मांसपेशियों के कमजोर पड़ जाने, कंधे की मांसपेशियों में वजन उठाने से खिंचाव, कंधों पर अधिक जोर पड़ने आदि कारणों से हो जाता है।
गर्दन की मांसपेशियों की अकड़न या कमजोर पड़ जाने के कारण गर्दन में भी दर्द हो सकता है जिसे ‘सरवाइकल पेन’ भी कहा जाता है। गर्दन झुकाकर या एक तरफ मोड़कर लंबे समय तक कार्य करने, झटका लगने आदि के कारण यह दर्द उठ सकता है। ऊंचे तकिये पर सोना या लेटकर अधिक देर तक पढ़ते रहने पर भी गर्दन का दर्द उठ सकता है। कमर के ऊपरी भाग में दर्द का होना एक आम समस्या होती है। दर्द कंधे या कमर को झुका कर लगातार एक स्थिति में लंबे समय तक कार्य करने से, रीढ़ की हड्डियों से संबंधित मांसपेशियों या लिगामेन्ट में खिंचाव आने या कमजोर पड़ने के कारण होता है।
पीठ के मध्य भाग में भी दर्द होने की समस्या देखने में आती है। यह दर्द अस्थि या कशेरूकाओं के क्षतिग्रस्त होने या स्नायुओं में दबाव पड़ने से भी हो सकता है। इस दर्द को ‘स्पाइनल पेन’ भी कहा जाता है। यह दर्द अत्यन्त कष्टकारी होता है।
कमर के निचले हिस्से में दर्द का होना आम समस्या बन चुकी है। कमर झुकाकर लंबे समय तक बैठना, पालथी मारकर बैठना, भारी बोझ उठाना, झटका लग जाना, मांस-पेशियों में खिंचाव आना या उनके क्षतिग्रस्त हो जाने के कारणों से शुरू होता है। आस्टियोमेलाइटिस और आस्टियोपोरोसिस रोगों के कारण से भी कमर के निचले भाग में दर्द शुरू हो जाता है।
पीठ दर्द किसी भी कारण से क्यों न हो, अनदेखा नहीं करना चाहिए। दर्द होने के कारण गंभीर भी हो सकते हैं। चिकित्सक से परामर्श लेकर उचित जांच कराकर उपचार प्रारंभ कर देना ही हितकर होता है। अधिक दर्द होने पर आराम करना भी अति आवश्यक है। अगर मध्यम या हल्का दर्द बराबर या लंबे समय तक बना रहे तो डॉक्टरी परीक्षण करके उसके कारण को अवश्य जान लेना चाहिए।
सोते समय पतले तकिए का प्रयोग करना, घुटनों के नीचे तकिया लगाना, सख्त बिस्तर पर सोना, मालिश, सिंकाई, ट्रैक्शन, व्यायाम, योगासनों तथा दर्द निवारक गोलियों से कमर के दर्द में आराम हो सकता है। दर्द निवारक गोलियों का प्रयोग हमेशा चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
सोने या लेटने के लिए सख्त एवं समतल पलंग या जमीन पर सोना बेहतर माना जाता है। गद्दा न तो बहुत सख्त और न ही बहुत मुलायम ही होना चाहिए। अगर चारपाई पर सोते हों तो अच्छी तरह कसी हुई होनी चाहिए। तकिया एक या दो इंच से अधिक मोटा नहीं होना चाहिए। अगर कमर दर्द की समस्या है तो सीधे लेटते समय घुटनों के नीचे तकिया लगा लें। करवट लेटते समय नीचे वाला पैर सीधा और ऊपर वाला पैर घुटने व कूल्हे सुविधानुसार मोड़ें। घुटना कूल्हे से ऊपर होना चाहिए।
बैठते समय हमेशा कमर सीधी रखें तथा गर्दन भी सीधी रखें। पीठ को कुर्सी की पीठ से सटाकर रखना चाहिए। अगर कुर्सी की पीठ दस इंच (अंश) पीछे की ओर झुकी हुई हो तो अधिक बेहतर है। कुर्सी इतनी ऊंची होनी चाहिए कि पंजे पूरी तरह जमीन पर और घुटने कूल्हे के जोड़ से ऊंचे रहें। कुर्सी से उठने के लिए कुर्सी पर पहले आगे खिसकें, दोनों हाथों को हत्थे पर रखें तथा बिना कमर झुकाए तथा हाथों का सहारा लिए ही सीधे खड़े हों। रसोई में एक स्टूल अवश्य रखें। स्टूल बैठने तथा ऊंचाई से सामान उतारने दोनों ही स्थिति में काम आएगा। घर की सफाई के लिए लंबी झाड़ू का उपयोग करें जिससे कमर अधिक देर तक झुकी न रहे। बेहतर होगा कि घर की सफाई बैठकर ही करें। अनाज बीनते समय, सब्जियां काटने के लिए, मेज, कुर्सी या चौकी का ही प्रयोग करें।
ढीले वस्त्र पहनें (कम से कम घर में रहने पर)। बेल्ट या नाड़े को अधिक न कसें। ऊंची एड़ी के जूते व चप्पलों का प्रयोग न करें क्योंकि इससे कमर के स्नायुओं और मांसपेशियों पर अधिक तनाव पड़ता है। वजन लेकर चलते समय यथा संभव दोनों हाथों से वजन उठायें। बोझ उठाते समय कमर को सीधा रखकर घुटना मोड़कर ही बैठें।
कमर या पीठदर्द छात्र, गृहिणी, अध्यापक, क्लर्क, आफिसर वैज्ञानिक, डॉक्टर, संपादक, लेखक, वकील, मजदूर, किसान आदि सभी की यह आम समस्या बनती जा रही है। जीवन को सुचारु रूप से चलते रहने के लिए आवश्यक है कि इन दर्दों से बचा जाए।

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