इलाज से परहेज आसान है कैंसर से बचने के लिए

 

कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से बचाव के लिए बहुत जरूरी है कि हम सही प्रकार का भोजन करें, धूम्रपान न करें और उन चीजों से परहेज करें जो कैंसर का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अगर हम सही भोजन करें तो न केवल कैंसर बल्कि बहुत सी बीमारियों से अपना बचाव कर सकते हैं। कैंसर से बचाव के लिए भोजन में रेशे की मात्रा को बढ़ाएं। रेशेदार भोजन अर्थात् भोजन में अनाज, दालों, फल व सब्जियों की मात्रा में बढ़ोत्तरी करें।

बचपन से ही आपने देखा होगा कि बड़े लोग गाजर अधिक खाने की सलाह देते हैं और कहते हैं कि गाजर आंखों के लिए अच्छी होती है। इस बारे में शायद आपको मालूम नहीं होगा कि गाजर कैंसर होने की संभावना कम करती है। गाजर में उपस्थित तत्व बेटा केरोटिन गुर्दे, गले व पेट के कैंसर से बचाव करता है। बैटा केरोटिन न केवल गाजर में बल्कि हरी पत्तेदार सब्जियों पालक व धनिया तथा फल जैसे आम व पपीते में भी पाया जाता है। हमें 1.5 मिलीग्राम बेटा कैरोटिन की प्रतिदिन आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति एक बड़ी कटोरी गाजर या पालक कर देती है।

बेटा केरोटिन के अतिरिक्त अपने भोजन में विटामिन बी की मात्रा को भी बढ़ाएं। विटामिन बी की कमी से अल्सर हो सकता है जो बाद में कैंसर का रूप धारण कर लेता है। पेट के कैंसर से बचाव के लिए विटामिन सी का सेवन भी जरूरी है। विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं-आंवला, टमाटर, संतरा, नींबू आदि। नए प्रयोगों से यह भी सामने आया है कि स्तन कैंसर व फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए विटामिन ई भी लाभदायक सिद्ध हुआ है। विटामिन ई के स्रोत हैं तिल का तेल, सूर्यमुखी के पौधों का तेल, बादाम, आदि।

अपने भोजन में उपरोक्त तत्वों की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ कुछ तत्वों को अपने भोजन में से निकालें या इनकी मात्रा कम करें। नवीन खोजों के फलस्वरूप सामने आया है कि वसायुक्त भोजन का संबंध कुछ प्रकार के कैंसर से है जैसे स्तन कैंसर। नेशनल अकादमी ऑफ साइंस द्वारा किए गए एक प्रयोग से यह निष्कर्ष सामने आया है कि वसायुक्त भोजन कैंसर होने की संभावना को बढ़ाता है इसलिए अपने भोजन में तैलीय पदार्थों में कमी लाएं। मशीनों में प्रोसेस किया हुआ आहार कम से कम लें। इनमें कुछ कृत्रिम रंग और गंध मिलाए जाते हैं जो आमाशय के कैंसर की संभावना को बढ़ाते हैं। साथ ही साथ प्रोसेस किया हुआ आहार कम रेशेदार होता है। शराब का सेवन भी कैंसर की संभावना को बढ़ाता है इसलिए इसका प्रयोग न करें।

कैंसर की संभावना कम करने के लिए सबसे जरूरी है-मोटापे पर नियंत्रण, इसलिए अपने वजन पर नियंत्रण रखें। भोजन में वसायुक्त तत्व कम करके आप वजन पर नियंत्रण रख सकते हैं। मांसाहारी भोजन के बजाय फल, सब्जियों, अनाज आदि का सेवन करें। मुंह, फेफड़ों और गले के कैंसर आदि का मुख्य कारण है धूम्रपान। इंडियन कैंसर सोसायटी ने यह स्पष्ट किया है कि सिगरेट पीना तो खतरनाक है ही, बीड़ी पीना उससे कहीं अधिक खतरनाक है। आंध्र प्रदेश में अधिकतर देखा गया है कि लोग सिगरेट या बीड़ी पीने के पश्चात् उसका आखिर का जला हुआ भाग भी मुंह में ले लेते हैं जो मुंह का कैंसर होने का कारण बनता है।

धूम्रपान करने वाले व्यक्ति अपने आस पास के लोगों में भी कैंसर व अन्य बीमारियों की संभावना को बढ़ा देते हैं इसलिए घर पर व ऑफिस में धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को मना करें कि वे धूम्रपान कर रहे हैं तो बाहर करें। उन्हें यह आदत छोड़ने के लिए भी प्रोत्साहित करें। इसके अतिरिक्त वातावरण में फैली दूषित गैसें प्रदूषण बढ़ाती हैं जैसे ओजोन, सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड आदि, इसलिए अगर आप प्रदूषित वातावरण में रह रहे हैं तो हर सप्ताह दो तीन दिन खुले वातावरण में जाएं जहां आप शुद्ध वायु में सांस ले सकें।

अगर आप व्यायाम या प्रात:काल सैर के लिए जाते हैं तो उन स्थानों पर न जाएं जहां बहुत अधिक यातायात होता है। इसके अतिरिक्त बेवजह एक्सरे न कराएं। इसके रेडिएशन से आपको रक्त कैंसर भी हो सकता है। रेडिएशन के और भी स्रोत हैं जैसे टी. वी., वीडियो, पेसमेकर आदि परंतु आप इन सब के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, इसलिए मेडिकल एक्सरे सीमित कराएं यानी आवश्यकता होने पर ही।

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