असम सरकार ने मोदी सरकार से अपील की एनआरसी बिल रद्द करें

Hemant Biswa Sarma

नई दिल्ली : असम सरकार ने केंद्र सरकार से हाल में जारी किए गए नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) बिल को रद्द करने की अपील की है। इसकी जानकारी असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्वा सरमा ने बुधवार को दी। गुवाहाटी में एक पत्रकार सम्‍मेलन के दौरान भाजपा नेता ने बताया कि पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से वर्तमान स्वरूप में एनआरसी को खारिज करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि असम सरकार ने एनआरसी को स्वीकार नहीं किया है।

पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय एनआरसी हो : असम वित्त मंत्री

वहीं सरमा ने कहा कि असम की राज्य सरकार ने पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय एनआरसी का समर्थ किया है। उन्होंने कहा कि अगर कट ऑफ साल 1971 है तो उसके अनुसार यह सभी राज्यों के लिए एक समान होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हम असम समझौते को रद्द नहीं कराना चाहते।

हम सिस्टम की खामियों से चिंतित हैं : राज्य समन्वयक

एनआरसी के पूर्व राज्य समन्वयक ने प्रतीक हजेला की कड़ी आलोचना की और यह आरोप लगाया कि राज्य सरकार को अलग रखकर अद्यतनीकरण (अपडेशन) की प्रक्रिया पूरी की गई है। भाजपा नेता का कहना है कि पूरे देश को लगता है कि एनआरसी को असम सरकार ने अद्यतन (अपडेट) किया है। पर ऐसा नहीं है हम केवल एक व्यक्ति के कारण खामियाजा भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम प्रणाली (सिस्टम) की खामियों से चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि हजेला ने अलग पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) के तहत शो चलाया। जिसमें उसने सवालों की एक परत बना रखी है। साथ ही उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में हमें अब जवाब देने में दिक्कत हो रही है।

डेटा में गड़बड़ी का लगाया आरोप

असम में भाजपा के लिए सबसे मजबूत नेता माने जाने वाले मंत्री हेमंत ने लगातार इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई है। हेमंत का कहना है कि साल 1971 से पहले बांग्लादेश से बतौर शरणार्थी आए सभी भारतीयों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं किए गए हैं क्योंकि अफसरों ने शरणार्थी प्रमाण पत्र लेने से इनकार कर दिया था। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि डेटा में गड़बड़ी करके अपात्र लोगों को लिस्ट में शामिल किया गया है।

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