कहीं आप पैरों के घाव से परेशान तो नहीं ?

कोलकाता : अक्सर अपने भारतवर्ष में कोई न कोई जान पहचान या रिश्तेदार या मित्रमंडली का सदस्य पैर के घाव को लेकर परेशानी की शिकायत करता हुआ जरूर मिल जायेगा। पैर के घाव की समस्या इस कदर व्याप्त है कि अपने देश की जनसंख्या के दस प्रतिशत लोग पैरों के घाव की कोई न कोई समस्या से ग्रसित है। पैर के घाव से पीड़ित लोग महीनों या सालों-साल नीम हकीम, झाड़फूंक करने वालों व ओझाओं के चक्कर लगाते रहते हैं और तो और पड़ोसियों या मित्रगणों या पारिवारिक सदस्यों द्वारा सुझाये गए नए-नए विचित्र नुस्खे या तरह-तरह के लेपों को घाव पर अजमाने का सिलसिला निरन्तर जारी रहता है, पर समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है। बल्कि ठीक होने की बात तो दूर, उल्टे घाव और गम्भीर व लाइलाज हो जाता है और अन्तत: पैर कटवाने की नौबत आ जाती है।

पैरों में काले निशान घाव के आगमन का सूचक : अगर आपके टांगों या पैरों में चकत्तेदार काले निशान है और पैर में थोड़ी बहुत सूजन भी है और इसके साथ थोड़ा चलने पर बहुत ज्यादा थकान महसूस होती हैं तो आप समझ लीजिये कि आपके पैरों में घाव के आगमन की घोषणा हो चुकी हैं। अभी भी वक्त है आपके पास सचेत होने के लिये । तुरन्त किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श लेकर अपना इलाज शुरू कर दें जिससे पैरों में घाव बनने से रोका जा सके। यह बात भी समझ लीजिये कि यह पैरों में काले निशान सी.वी.आई. नामक रोग का सूचक है, जिसमें पैरों में गन्दा खून ऊपर चढ़ने की गति अत्यधिक धीमी या ना के बराबर हो जाती है।

डायबिटीज पैरों के घाव के लिए एक बड़ा खतरा : अगर आप बढ़े ब्लडशुगर से पीड़ित हैं और आप पैरों की व अपनी ठीक से देखभाल नहीं कर रहे हैं। अगर आपका शरीर का वजन निर्धारित सीमा से ऊपर है और आप घास पर या जमीन पर नंगे पैर चलते हैं या फिर पैरों में खरोंच या फफोले या लाल निशान पड़ने पर उसकी ओर ध्यान नहीं देते हैं तो आप देर सवेर अपने पैरों को खतरे में डाल रहे हैं। इसलिये डायबिटीज के मरीज को चाहिये कि वह हर तीन महीने में पैरों को किसी अनुभवी वैस्क्युलर सर्जन से जाँच करवाते रहें।

धूम्रपान पैरों में घाव होने का एक मुख्य कारण है : अगर आप बीड़ी या सिगरेट पीने के आदी हैं या फिर खैनी, जर्दा युक्त पान मसाला, या तम्बाकू के सेवन के भयंकर आदी हो चुके हैं, तो मैं आपको प्रमाण पत्र दे सकता हूँ कि भविष्य में देर सवेर आप अपने पैर या टांगों में घाव व गैंगरीन जरूर पैदा करेंगे और अंततोगत्वा टांगों से भी वंचित हो जायेंगे क्योंकि आप शायद नहीं जानते हैं कि टांगों को सुचारु रूप से काम करने के लिये ऑक्सीजन की जरूरत होती हैं और इस ऑक्सीजन को पैरों तक पँहुचाने का काम शुद्ध खून की सप्लाई करने वाली रक्त नलियाँ (धमनी) होती हैं। ये धमनियाँ टांगों में स्थित होती हैं। तम्बाकू में पाया जाने वाला निकोटिन पदार्थ टांगों की इन रक्त नलियों में सिकुड़न पैदा कर देता है। समस्या गम्भीर होने पर यह खून की नलियाँ पूरी तरह से बन्द हो जाती हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि पैरों को जाने वाली शुद्ध रक्त की सप्लाई बहुत ज्यादा गिर जाती हैं और पैरों को ऑक्सीजन की आवश्यक मात्रा नहीं मिल पाती और जिससे पैरों में लाइलाज घाव व गैंगरीन पैदा हो जाती है। अन्त में पैर खोने के अलावा हमारे सामने कोई और विकल्प नहीं बचता है।

टांगों पर उभरी नीली नसें भी घाव का एक कारण : अगर आपके टांगों में मकड़ीनुमा या केंचुए की तरह उभरी हुई नीली नसें हैं और आप ऑफिस में कम्प्यूटर के सामने या घर पर टेलीविजन सेट के सामने प्रतिदिन घंटों लगातार बैठते हैं तो यह बात आप नोट कर लें कि आपके पैरों में घाव पैदा होना निश्चित है। इसलिये जैसे ही आप अपनी टांगों पर उभरी हुई नीली नसें देखें तो तुरन्त किसी वैस्क्युलर सर्जन से सम्पर्क करें और उनका परामर्श लेकर उचित इलाज करायें जिससे घावों को बनने से रोका जा सके।

घाव होने पर क्या करें ? : अगर आप पैरों के लाइलाज घाव से पीड़ित हैं तो आप ऐसे अस्पतालों में जायें जहाँ सी.टी.वीनोग्राफी, एंजियोग्राफी व एम.आर.आई. की सुविधा हो, साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित कर लें कि इन अस्पतालों में वैस्क्युलर सर्जरी का विभाग है कि नहीं व किसी वैस्क्युलर सर्जन की चौबीस घंटे उपलब्धता है कि नहीं। इन जरूरी बातों को ध्यान में रखकर ही अपने इलाज के लिये सही अस्पताल का चुनाव करें, अन्यथा इलाज के नाम पर खानापूर्ति होती रहेगी और घाव ज्यों का त्यों बना रहेगा या फिर और खराब हो जायेगा । घाव के इलाज में लेजर तकनीक व आर.एफ.ए. तकनीक का भी बड़ा महत्वपूर्ण रोल हैं। इसलिये मैं आपसे निवेदन करूँगा कि आप सही अस्पताल व सही वैस्क्युलर सर्जन के पास ही जायें तभी लाइलाज घावों से निजात मिल पायेंगी।

डॉ. के.के. पांडेय (सीनियर वैस्कुलर एवं कार्डियो थोरेसिक सर्जन)

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