अमेरिका ने भारत-पाक मुद्दे पर ट्रंप के बयान का किया बचाव, एस जयशंकर ने भी दिया जवाब

Donald Trump Statement, Indo-Pak Mediation

वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच ”मध्यस्थता” के लिए तैयार होने की बात सोमवार को व्हाइट हाउस में की थी। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने ट्रंप के बयान का बचाव करते हुए मंगलवार को कहा कि कश्मीर दोनों पक्षों (भारत और पाकिस्तान) के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा है। ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान और भारत के बीच किसी भी बातचीत का स्वागत करता है और अमेरिका सहायता के लिए तैयार है। मालूम हो कि, पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान अमेरिकी दौरे पर हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति से व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान इस बात पर चर्चा हुई है।

विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के बयान का किया बचाव

अमेेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप के भारत पाक के कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता वाले बयान का बचाव करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के लिए चर्चा का मुद्दा है। साथ ही कहा कि हमारी दशकों से यही इच्छा रही है कि कश्मीर भारत-पाक के बीच का मुद्दा है और इन दोनों देशों को ही बातचीत की दिशा तय करनी है। साथ ही कहा, “हम दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत का माहौल बनाने की कोशिशों का समर्थन करते हैं। इसके लिए सबसे जरूरी बात है आतंकवाद का खात्मा हो जैसा की राष्ट्रपति ने कहा- हम इसमें मदद के लिए तैयार हैं।”

भारतीय विदेश मंत्रालय ने खारिज किया ट्रंप का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में पाक के प्रधानमंत्री के समक्ष कहा कि उन्हें कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कर के खुशी होगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि हाल ही की मुलाकात में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर पर मध्यस्थता के लिए कहा था। ट्रंप के इस विवादित बयान को भारतीय विदेश मंत्रालय ने खारिज करते हुए कहा कि मोदी की तरफ से कभी ऐसी कोई मांग नहीं की गई। भारत अपने निर्णय पर कायम है। पाकिस्तान के साथ सारे मसले द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही हल किए जाएंगे। पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए उसका सीमा पार आतंकवाद बंद करना जरूरी है।

भारतीय विदेश मंत्री ने भी दिया बयान

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मगंलवार लोकसभा एवं राज्यसभा में विपक्ष द्वारा यह मुद्दा उठाये जाने पर विदेश मंत्री जयशंकर ने दोनों सदनों में बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हम सदन को पूरी तरह आश्वस्त करना चाहेंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है।’’ यह भारत-पाक का आपसी मसला, प्रधानमंत्री मोदी ने कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मध्यस्थता के लिए नहीं कहा। कश्मीर भारत-पाक का द्विपक्षीय मुद्दा है। इसे दोनों देश मिलकर सुलझाएंगे। साथ ही कहा कि पहले पाकिस्तान आतंकवाद पर लगाम लगाए। कश्मीर मसले पर शिमला और लाहौर संधि के जरिए ही आगे बढ़ेंगे।‘

राहुल गांधी ने मोदी पर विश्वासघात के लगाये आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के लिए कहा। अगर यह सच है तो प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के हितों और 1972 के शिमला समझौते के साथ विश्वासघात किया है।’’ साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘एक कमजोर विदेश मंत्रालय के इनकार करने से काम नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री देश को बताएं कि उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच मुलाकात में क्या बात हुई थी।’’

मोदी से मांगा जवाब

लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि भारत सरकार ने ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने सिर झुका दिया है।’’ उन्होंने कहा कि हमारा देश बहुत ताकतवर है, वह किसी के सामने नहीं झुक सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में आएं और जवाब दें। अन्य विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है और भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति का जो बयान आया है, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री को सदन में आ कर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

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