योगी सरकार की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लगाई रोक

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लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान नुकसान की भरपाई के लिए जारी वसूली नोटिस पर राेक लगा दी हैै। एडीएम सिटी कानपुर ने हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर नोटिस जारी किया था जिस पर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश पंकज नकवी और न्यायाधीश एस एस शमशेरी की पीठ ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। बता दें कि कानपुर के मोहम्मद फैजान ने एडीएम सिटी द्वारा इस वर्ष 4 जनवरी को जारी नोटिस को चुनौती देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

न्यायाधीश ही कर सकता है नुकसान का आंकलन

फैजान ने याचिका में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा तय किए गए दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया है। साथ ही याचिका में ‌लिखा है, ‘उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान का आंकलन करने का अधिकार उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश को ही है। एडीएम सिटी इस मामले में नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं रखती।’

जुर्माना न चुकाने पर संपत्ति की जाएगी कुर्क

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हिंसक प्रदर्शन देखा गया था जिस दौरान पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई थीं। ह‌िंसा के कारण राज्य की सार्वजनिक संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचाया गया था जिसकी भरपाई के लिए योगी सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और सीसीटीवी फुटेज व जांच एजेंसियों के जरिए हिंसा भड़काने वालों की पहचान कर उन्हें वसूली का नोटिस जारी किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट कह दिया है कि नोटिस में लिखी जुर्माने की रकम न चुकाने पर संबंधित व्यक्ति की संपत्ति कुर्क की जा सकती है।

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