भारतीय अर्थव्यवस्था का प्राण तत्व है कृषि : राज्यपाल फागू चौहान

Fagu Chauhan appointed new Governor of Bihar

पटना : बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने कृषि एवं इसके अनुषंगी क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था का प्राण तत्व बताया और कहा कि देश के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।
फागू चौहान ने शुक्र‍वार को यहां राजभवन परिसर स्थित राजेंद्र मंडप में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के द्वारा संयोजित ‘उद्यान प्रदर्शनी’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि देश के विकास में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति इसी पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि देश की एक चौथाई राष्ट्रीय आय, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से ही प्राप्त होती है। कुल निर्यात में 16 प्रतिशत हिस्सा कृषि से ही प्राप्त होता है। राज्यपाल ने कहा कि परंपरागत खेती से हटकर किसानों को मधुमक्खी-पालन, मुर्गीपालन, मशरूम, फल-फूल तथा सुगंधित एवं औषधीय पौधों के उत्पादन, बकरी-पालन और गो-पालन जैसे कृषि आधारित उद्योगों से जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि गो-पालन एक लाभदायक व्यवसाय है। विशेषकर देशी गायों का दूध, गोबर और गोमूत्र-तीनों ही उपयोगी हैं। चौहान ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्यत: कृषि पर आधारित है। बिहार-विभाजन के बाद अधिकांश खनिज संपदा झारखंड के ही हिस्से में चली गयी, इसलिए बिहार का विकास मूल रूप से कृषि पर ही अवलंबित हो गया। उन्होंने कहा कि राज्य विभाजन के बाद बिहार ने काफी कुशलतापूर्वक अपनी अर्थव्यवस्था को संभाला एवं विकास-प्रयासों को गति दी। राज्यपाल ने कहा कि बिहार की विकास-दर आज देश की विकास-दर से भी अधिक 15 प्रतिशत है। निश्चय ही यह राज्य के ठोस विकास-प्रयासों और कुशल वित्तीय प्रबंधन का परिचायक है। उन्होंने कहा कि विकास-दर में कृषि प्रक्षेत्र का योगदान बढ़े- अब इस दिशा में भी सोचने का समय आ गया है। राज्यपाल ने कहा कि किसानों को उनकी जमीन की उत्पादकता बढ़ाने में मदद के लिए ‘स्वायल हैल्थ कार्ड स्कीम’ शुरू की गयी है। समेकित कृषि-प्रणाली के जरिये किसानों की वार्षिक आय में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बिहार राज्य में दो हजार से अधिक किसानों ने समेकित कृषि-प्रणाली को अपनाया है, जिससे उन्हें प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष दो से ढाई लाख रुपये तक आमदनी हुई है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य में ‘नीली क्रांति’ योजना लागू करते हुए मछली-उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली गयी है। राज्य में खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग के बढ़ावा के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ शुरू की गयी है। उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ तो आज किसानों की आय का सुरक्षा-कवच ही है। चौहान ने कहा कि बिहार सरकार ने कृषि-विकास के लिए सार्थक प्रयास किया है। ‘तीसरे कृषि रोड-मैप’ के जरिये समेकित तथा जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा रही है। वर्ष 2017 से 2022 तक पांच वर्ष की अवधि में ‘तीसरे कृषि-रोड मैप’ के आलोक में कृषि पर 1 लाख 54 हजार करोड़ रुपये व्यय किए जायेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए ‘इनपुट अनुदान’ की व्यवस्था के साथ-साथ ‘जैविक कॉरिडोर’ बनाने के लिए भी कार्रवाई की जा रही है। जैविक सब्जी की खेती करने के लिए किसानों को बीज एवं जैविक उत्पादन के क्रय के लिए राशि सीधे उनके खातों में ‘इनपुट अनुदान कार्यक्रम’ के तहत प्रदान की जा रही है। साथ ही सहकारी प्रक्षेत्र का सहयोग लेते हुए सब्जी-संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन की त्रिस्तरीय व्यवस्था बहाल की गयी है। चौहान ने कहा कि राज्य में पशु एवं मत्स्य संसाधनों के विकास के जरिये ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। देशी नस्ल की गायों के जरिये दुग्ध-उत्पादन को बढ़ावा देकर बिहार एवं पूरे देश का आर्थिक सशक्तीकरण हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दूसरी ‘हरित क्रांति’ का सर्वाधिक बेहतर परिणाम बिहार में ही देखने को मिलेगा।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी उपलब्धियों के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त करने में सफल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशिक्षण एवं अनुसंधान पर विशेष ध्यान दे रहा है। कार्यक्रम में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा, कृषि विभाग के अपर सचिव आर.एन. राय, उद्यान निदेशक नंद कुमार आदि भी उपस्थित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य में कृषि के साथ-साथ इसके अनुषंगी क्षेत्रों के विकास के लिए भी ‘तृतीय कृषि रोड-मैप’ के आलोक में चरणबद्ध प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने राज्य के 13 जिलों में ‘जैविक कैरिडोर’ तत्काल स्थापित करने की योजना की जानकारी देते हुए कहा कि जैविक कृषि तथा फल-फूल-सब्जी -उत्पादन के प्रयासों को सरकार भरपूर प्रोत्साहित कर रही है। प्रदर्शनी में कुल सात समूहों -सब्जी, फल, पत्तेदार पौधे (गमले में), मौसमी फूल, मौसमी फूल (डंठल सहित), सुगंधित एवं औषधीय पौधे से जुड़े 884 प्रदर्श शामिल किए गये।

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