सुप्रीम कोर्ट को मिली 885 करोड़ की लागत से बनी नई अत्याधुनिक इमारत

Supreme Court new building,

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट को 885 करोड़ रुपये की लागत से बनी नई इमारत मिल गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 17 जुलाई बुधवार की शाम नई इमारत का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नई इमारत अनूठी है, क्योंकि यह सौर उर्जा, पर्यावरण और जल संरक्षण की खासियत अपने अंदर समेटे हुए है। सात साल में बनकर तैयार हुई इस इमारत में शीर्ष अदालत के प्रमुख न्यायाधीश रंजन गोगोई, सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की उप‌स्थिति में उद्घाटन का कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। इस दौरान शाम को 4:30 बजे एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया ‌था।

अब तक की सबसे बड़ी इमारत

12.19 एकड़ में करीब 885 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस नई इमारत में 15 लाख 40 हजार वर्ग फीट जगह उपलब्ध है। सोलर एनर्जी युक्त विश्व स्तरीय खूबियों वाला सुप्रीम कोर्ट यह नया परिसर अप्पू घर को रिप्लेश करके बनाया गया है। बता दें ‌कि भवन निर्माण विभाग (सीपीडब्लूडी) की ओर से बनाई गई यह अब तक की सबसे बड़ी इमारत है। सुप्रीम कोर्ट के पास सड़क के दूसरी तरफ प्रगति मैदान होने की वजह से नई इमारत भूमिगत रास्ते के जरिए पुरानी इमारत से जुड़ी हुई है। दरअसल, नई इमारत को बनाने का काम शुरूआत में एक निजी कंपनी को सौंपा गया था, लेकिन वह काम नहीं कर पाई और तीन साल बाद इसकी जिम्मेदारी सीपीडब्लूडी को देे दिया गया था।

सारा प्रशासनिक काम पुरानी इमारत में होंगे

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट का सारा प्रशासनिक काम, मुकदमों की फाइलिंग, कोर्ट के आदेशों और फैसलों की कापियां लेने आदि सभी काम नई इमारत से किया जाएगा। इस नई इमारत में तीन मंजिला पार्किंग की व्यवस्‍था की गई है जिसमें 2000 गाड़ियों रखी जा सकेंगी। साथ ही इसमें वकीलों को 500 नए चैंबर दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही इमारत में 650 और 250 लोगों की क्षमता वाले दो ऑडिटोरियम और एक बड़ा राउंड टेबल कॉन्‍फ्रेंस रूम बनाया गया है। सुरक्षा के लिहाज से पूरी इमारत में 825 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

इको फ्रेंडली बनाई गई है इमारत

इसकी छत पर एक बड़ा सोलर पैनल लगाया गया है और बिजली के लिए सेंसर तकनीक अपनाई गई है यानी जरूरत के अनुसार बिजली अपने आप चालू या बंद होगी। यहां लगे सोलर पावर ग्रिड की क्षमता 1400 किलोवाट की है, जो दिल्ली में एक इमारत में लगे किसी भी सोलर पैनल की तुलना में सबसे ज्यादा है। गौरतलब है कि यहां 100 प्रतिशत पूरी तरह सीवेज ट्रीटमेंट किया गया है। साथ ही बताया गया कि अपशिष्ट नगरपालिका की लाइन में नहीं डाला जाएगा। साथ ही बारिश के पानी के संरक्षण यानी रेनवॉटर हार्वेस्टिंग की भी व्यवस्था की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वैल्यू इंजीनियरिंग के चलते इस भवन के निर्माण की लागत में 60 करोड़ रुपयों की बचत हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले 9 भाषाओं में

इस मौके पर राष्ट्रपति कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के 9 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद की शुरू होने वाली सुविधा का अनावरण भी किया। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी होंगे। ये फैसले सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी अपलोड किए जाएंगे।

सुनवाई पुुुरानी इमारत में ही होगी

बता दें कि नई इमारत नई दिल्ली में प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन के नजदीक बनाई गई है। मुकदमों की सुनवाई पुरानी इमारत में ही की जाएगी। यहां तक की चीफ जस्टिस और अन्य न्यायाधीशों के दफ्तर भी पुरानी इमारत में बने रहेंगे। अधिकारियों ने बताया कि नई इमारत के ई ब्लॉक में कैंटीन, बैंक शाखा, डाकघर सहित रेलवे व फ्लाइट टिकट बुक कराने जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

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