45 वर्ष पहले देश पर थोपा गया आपातकाल, ‘लोकतंत्र की रक्षा करने वालों को नमन’ : प्रधानमंत्री

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इमरजेंसी पर ट्वीट करते हुए कहा कि ‘आज से ठीक 45 वर्ष पहले देश पर आपातकाल थोपा गया था। उस समय भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिन लोगों ने संघर्ष किया, यातनाएं झेलीं, उन सबको मेरा शत-शत नमन! उनका त्याग और बलिदान देश कभी नहीं भूल पाएगा।’

प्रधानमंत्री ने एक वीडियो भी किया शेयर

प्रधानमंत्री ने जून 2019 के अपने रेडियो संबोधन ‘मन की बात’ का एक क्लिप भी साझा की है, जिसमें उन्होंने आपातकाल का हवाला दिया था।अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम की उस कड़ी में मोदी ने लोगों को आपातकाल का स्मरण कराया था और उनसे लोकतंत्र को ‘हल्के’ में नहीं लेने का आग्रह करते हुए कहा था कि सामान्य जीवन में लोकतंत्र का क्या मजा है उसका पता तब चलता है जब वो छिन लिया जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों ने बाकी अन्य अधिकारों और जरूरतों की परवाह करते हुए 1977 के लोकसभा चुनाव में केवल लोकतंत्र के लिए मतदान किया था। मोदी ने कहा, ‘‘देश ने ऐसा चुनाव 1977 में देखा था।। 1 जब लोगों ने सिर्फ लोकतंत्र के लिए बाकी के अधिकारों, हकों की परवाह करते हुए मतदान किया था। ’

सत्ता के लालच में एक परिवार ने देश में आपातकाल लागू किया था : शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आपातकाल की 45वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए गुरुवार को कहा कि सत्ता के लोभ में एक परिवार ने देश में आपातकाल लागू किया था। शाह ने आज कई ट्वीट कर कांग्रेस पर निशाना साधा और आपातकाल को याद करते हुए कहा, ’45 साल पहले इस दिन सत्ता के लालच में एक परिवार ने देश में आपातकाल लागू कर दिया। रातों रात देश को जेल में बदल दिया गया। प्रेस, अदालतें, मुक्त भाषण। सबकी आवाज को कुचल दिया गया। गरीबों और दलितों पर अत्याचार किए गए।’ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 45 साल पहले 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाया था।

राजनीति स्वार्थों के लिए देश पर थोपा गया था आपातकाल: नड्डा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने देश में आपातकाल की 45वीं बरसी पर गुरुवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे इतिहास का काला अध्याय बताया और कहा कि यह अधिनायकवादी मानसिकता ने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए देश पर थोपा। श्री नड्डा ने टि््वटर पर‘आपातकाल का काला अध्याय’शीर्षक से साझा पोस्ट में लिखा ‘वर्ष 1975 में आज ही के दिन निहित राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा कर सरकार के खिलाफ बोलने वालों को जेल में डाल दिया गया था, देशवासियों के मूलभूत अधिकार छीनकर अखबारों के दफ्तरों पर ताले लगा दिए गए थे।‘’उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस द्वारा थोपे गए शर्मनाक आपातकाल की बरसी पर मैं उन सभी राष्ट्रभक्तों को नमन करता हूं जिन्होंने घोर अन्याय व यातनाएं सहने के बावजूद लोकतंत्र की हत्या करने वालों के सामने घुटने नहीं टेके।’’

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