130 रेल यात्रियों को नहीं पता था, ऐसे हो जाएगा उनका आखिरी सफर

17 वर्ष पहले हुए हादसे में मारे गए 130 रेल यात्रियों को रेलवे ने दी श्रद्धांजलि
औरंगाबादः 17 वर्ष पहले अपनों से बिछड़ने का गम और मिलन की खुशी लिये हावड़ा से दिल्ली की ओर निकले उन 130 यात्रियों को यह नहीं पता था कि उस दिन उनका आखिरी सफर है। उसके बाद उनकी नींद कभी नहीं खुलेगी। राजधानी एक्सप्रेस की उस भयावह दुर्घटना को याद कर लोग आज भी सहम जाते हैं। औरंगाबाद जिले में पूर्व-मध्य रेलवे के रफीगंज रेलवे स्टेशन के नजदीक धावा पुल पर 09 सितंबर 2002 की देर रात राजधानी एक्सप्रेस दुर्घटना की 17 वीं बरसी को लेकर सोमवार देर रात घटनास्थल पर इस दुर्घटना में मृत यात्रियों की याद में मोमबत्ती जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और एक मिनट का मौन रखा गया। उस रेल पटरी की पूजा-अर्चना कर ईश्वर से प्रार्थना की गई कि भविष्य में ऐसी दुर्घटना कभी नहीं हो। इस कार्यक्रम में स्थानीय रेल कर्मचारियों अधिकारियों के अलावा नागरिकों ने भी हिस्सा लिया।

नौ सितंबर 2002 की है घटना
हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस 09 सितंबर 2002 की रात अपनी पूरी गति से दिल्ली की ओर जा रही थी। रात लगभग साढ़े 11 बजे जब ट्रेन रफीगंज रेलवे स्टेशन से आगे बढ़ी और धावा रेलवे पुल पर पहुंची तो अचानक एक जोरदार झटका लगा और ट्रेन की 13 बोगियां पुल तोड़ते हुए नदी में जा गिरी। नदी में उस वक्त ज्यादा पानी नहीं था फिर भी एक के ऊपर एक गिरी बोगियां इस कदर क्षतिग्रस्त हो गईं कि ट्रेन में सवार 130 लोगों की मौत हो गई थी तथा 400 लोग घायल हो गए थे।

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