हृदय रोग और होम्योपैथी

भारत में पिछले वर्ष विश्व के 60 प्रतिशत हृदय रोग के मामले पाए गए थे। अध्ययन में देखा गया है कि पिछले दशक के दौरान दक्षिण भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में भी हृदय रोग का खतरा बहुत तेजी से बढ़ा है। पुरुषों में मधुमेह का स्तर 5 से 12 प्रतिशत अधिक और महिलाओं में 3 प्रतिशत से 7 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। युवाओं में इस तरह के बदलावों के कारण उनमें हृदय रोग और दिल का दौरा पड़ने की दर बहुत अधिक हो रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार पश्चिमी खानपान को मोटापा बढ़ाने और इसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए जिम्मेदार माना जाता है। भारत में खानपान एक जैसा नहीं है। अनेक प्रमुख भारतीय व्यंजनों को स्वास्थ्यकर नहीं माना जाता है क्योंकि इसमें शुगर और सेचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक पाई जाती है। गठिया, अजीर्ण, टाइफायड, न्युमोनिया आदि कारणों से रोगी को हृदय का रोग हो जाता है। इन रोगों के कारण रोगी का हृदय रोगग्रस्त हो जाता है जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है, हृदय की धड़कन असामान्य हो जाती है और हृदय में दर्द होता है। हालांकि सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है। जरूरी नहीं है कि सीने का दर्द हार्ट अटैक का दर्द ही हो। हार्ट अटैक और एंजाइना सबसे गंभीर कारण होता है। अगर आप चालीस वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं और आपके सीने में दर्द हो रहा हो तो इस हालत में इस दर्द को हृदय रोग ही मानें। हार्ट अटैक के 50 प्रतिशत मरीजों की अस्पताल पहुँचने से पहले ही मृत्यु हो जाती है। हृदय रोग पूरे विश्व में आज एक गंभीर बीमारी के तौर पर उभरा है। हर साल विश्व हृदय दिवस के बहाने पूरे विश्व के लोगों में इसके बारे में जागरूकता फैलाई जाती है। अपने देश में तो अब कम उम्र के लोग भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है तनाव। लेकिन इन सबके अलावा आजकल हृदयरोग से जुड़े ऐसे कई मिथक भी सामने आ रहे हैं,जो पूरी तरह बेबुनियाद होने के बावजूद अधिकांश लोगों के दिमाग में घर किए रहते हैं। ये गलत-सही जानकारियां हमें कहीं से भी मिल सकती हैं, लेकिन इन पर विश्वास करना हमारे हृदय के लिए हानिकारक हो सकता है। हृदय विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें हृदयरोगियों का उपचार करते समय उन्हें रोगियों के ऐसे कई मिथकों को भी दूर करना पड़ता है। कुछ मिथक तो बहुत आम होते हैं। जैसे – लोगों में यह आम धारणा होती है कि हर तरह का व्यायाम हृदय के लिए लाभकारी होता है। इसी तरह अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा कम होता। इन तरह की अनेक ऐसी धारणाएं हैं जो बहुत से लोगों में घर कर गई हैं। इन मिथकों को तोड़कर सही तथ्य स्पष्ट करने मात्र से रोगियों के हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
हृदय रोग क्या है ?
हृदय की मांसपेशिया जीवंत होती हैं और उन्हें जिन्दा रखने के लिए आहार और ऑक्सीजन चाहिए। हृदय की मांसपेशियों के अन्दर धमनियां होती हैं जो हृदय की इन मांसपेशियों को आहार और ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। इन धमनियों को कोरोनरी आर्टरीज कहा जाता है। जब इनमें से कोई एक या ज्यादा धमनी संकरी या आंशिक रूप से अवरुद्ध हो जाती हैं तो इससे कोरोनरी आर्टरी डिजीज हो जाती है। जब ऐसी एक या ज्यादा आर्टरी अवरुद्ध हो जाती है तो हृदय की कुछ मांसपेशियों को आहार और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। इस अवस्था को हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा कहते हैं।
हृदय रोग के लक्षण
• छाती के बीच में बेचैनी-दबाव, दर्द, जकड़न और भारीपन का अहसास होता है, यह अवस्था कुछ मिनट तक रह कर या तो गायब हो जाती है, या फिर लौट आती है।
• छाती के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी बेचैनी (दर्द या भारीपन) बांहों, कमर, गर्दन और जबड़े में भी महसूस हो सकती है। सीने में बेचैनी, बांहों, कंधों, जबड़े या गर्दन और कभी-कभी यहां से सीने तक भी पहुंच सकती है।
•पेट के ऊपरी हिस्से में भराव, एसिडिटी और अपच के साथ दर्द की शिकायत।
• छाती में दर्द शुरू होने से पहले सांस लेने में परेशानी।
• उपरोक्त लक्षणों के साथ-साथ उल्टी आने, पसीना छूटने या चक्कर आने की शिकायत भी हो सकती है।
• कभी-कभी बिना दर्द हुए सांस न आने या दम घुटने जैसे एकमात्र लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
हृदय हमारे शरीर का ऐसा अंग है जो लगातार पंप करता है और पूरे शरीर में रक्त प्रवाह को संचालित करता है। हृदय संचार प्रणाली के बीच में होता है और धमनियों और नसों जैसी रक्त वाहिनियां अशुद्ध रक्त को शरीर के हर भाग से हृदय तक ले जाती हैं और शुद्ध रक्त को हृदय से शरीर के हर भाग तक पहुंचाती हैं। भारत में अब कम उम्र के लोग भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। दिल का सबसे बड़ा दुश्मन है तनाव। ऐसे में इस बात की जरूरत है कि हम अपने दिल की आवाज सुनें, दिल को दुरुस्त स्वस्थ रखने के लिए तनाव को दूर भगाएं। तनाव के कारण मस्तिष्क से जो रसायन स्रावित होते हैं वे हृदय की पूरी प्रणाली खराब कर देते हैं। तनाव से उबरने के लिए योग का भी सहारा लिया जा सकता है। आज हमारे जीवन का आधे से भी ज्यादा समय हमारे कार्यस्थल/ऑफिस में बीतता है। ऐसे में हमें इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि अपनी कार्यप्रणाली के अनुरूप दिल की सेहत कैसे दुरुस्त रहे।
अपने दर्द को पहचानें
मेहनत का कोई कार्य करने पर एंजाइना का दर्द प्रारंभ हो जाता है। इस तरह का दर्द सीने के बीच में होता है। इस तरह का दर्द दोनों हाथ या बाएँ हाथ तक फैलता है। आराम करने पर इस तरह का दर्द ठीक हो जाता है। यह दर्द 5 से 10 मिनट तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। अगर दर्द हार्ट अटैक का है तो यह दर्द करीब आधा घंटे तक मरीज को परेशान करता है। ऐसे में मरीज को बेहद पसीना आता है, उसे उल्टी भी आ सकती है।
अगर आपके सामने कभी ऐसी समस्या आ जाए तो कृपया नीचे लिखी बातों पर तुरंत अमल करें
• दर्द का अनुभव होते ही जिस काम में भी आप लगे हों, उसे तुरंत रोक दें।
•अगर दर्द होने पर चक्कर आए या सिर में दर्द का अनुभव करें तो समझ जाइए कि आपका ब्लडप्रेशर बहुत ज्यादा कम हो गया है। इस अवस्था से बचने के लिये तुरंत नींबू नमक पानी लेना चाहिए।
• अगर दर्द का अहसास खाना खाते वक्त हो तो खाना धीरे-धीरे और रुक-रुक कर खाएँ। और कम खाएँ, भले ही आपको बार-बार खाना पड़े।
• सीने में दर्द उठने के साथ-साथ अगर चक्कर या बेहोशी आए तो तुरंत मरीज के दोनों पैर ऊँचा करके मरीज को लिटा दें।
• अगर आप दिल के रोगी हैं, हाई ब्लडप्रेशर या डायबिटीज के रोगी हैं तो आपको हर वक्त अपने पास इमरजेंसी फोन नंबर रखना चाहिए। डाॅक्टर को घर बुलाने से अच्छा होगा कि मरीज को तुरंत अस्पताल पहुँचाएँ जिससे कि मरीज को अचानक मौत (सडन डेथ) से बचाया जा सके।
दिल को स्वास्थ्य रखने के कुछ उपाय
• थोड़ा समय व्यायाम के लिए निकालें।
• प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे तक व्यायाम करना हृदय के लिए अच्छा होता है।
• समय की कमी है तो आप टहल सकते हैं।
• सेहत के अनुरूप आहार लें।
• नमक की कम मात्रा का सेवन करें।
• कम वसा वाले आहार लें।
• ताजा सब्जियां और फल लें।
• समय पर नाश्ता और समय पर लंच करें।
• तंबाकू से दूर रहें।
• घंटों एक ही स्थिति में बैठना हृदय के लिए हानिकारक हो सकता है। आज की भागदौड़ वाली जीवनशैली में तनाव भी बढ़ गया है। इससे पूरी तरह बचना तो मुश्किल है लेकिन जहां तक संभव हो इससे दूरी बनाए रखें।
हर दर्द हार्ट अटैक नहीं होता
कई अध्ययनों से यह बात सामने आ चुकी है कि छाती में दर्द के कुल मामलों में से करीब 33 प्रतिशत ही हार्ट से जुड़े होते हैं। बाकी दर्द पेट या स्पाइन से जुड़े होते हैं। कई ऐसे टेस्ट हैं जिसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि छाती का दर्द ‘लो रिस्क’ है या जानलेवा है। दर्द के भय से कुछ लोग अस्पताल जाकर डॉक्टरों के बातों में आकर अस्पताल एंजियोप्लास्टी जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर डालते हैं। कई विशेषज्ञों के अनुसार कई टेस्टों में एक टेस्ट ऐसा है, जिससे यह साफ हो जाता है कि छाती का दर्द हार्ट अटैक है या नहीं। ‘ट्रोपोनिन आई’ नामक एक ब्लड टेस्ट करने पर यह पता चल जाता है। अगर यह टेस्ट निगेटिव आता है तो यह निश्चित किया जा सकता है कि छाती का दर्द हार्ट अटैक नहीं हैं। लेकिन कई डॉक्टर यह टेस्ट करने के बजाय एंजियोग्राम कर देते हैं।
दिल की नली में ब्लॉक की जाँच इसी विधि से की जाती है। इस जाँच के बाद ही एंजियोप्लास्टी होती है।
कभी-कभी चिकित्सक समझ नहीं पाते हैं कि चेस्ट पेन क्यों हो रहा है। वह जानलेवा भी हो सकता है। लेकिन कुछ टेस्ट कराने से ही हमें इसका पता चलता है। छाती में दर्द फेफड़े, खाने की नली, पेट, मांसपेशी, हड्डी या त्वचा, एसिडिटी, गैस, में किसी भी वजह से उत्पन्न हो सकता है। कभी-कभी न्यूमोनिया भी छाती में दर्द का कारण बनता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि छाती में दर्द हो तो उसे मामूली समझें और अनदेखा करें। कभी-कभी जिसे हम पेट का दर्द समझते हैं, वह हार्ट अटैक का दर्द भी हो सकता है इसलिए छाती में जब कभी भी दर्द हो तो इसका टेस्ट करवाना ही चाहिए।
होम्योपैथी में इस बीमारी से निजात पाने के लिये कई कारगर औषधियाँ हैं जिन्हें आप शल्य चिकित्सा से पहले और बाद में लंबे अरसे तक व्यवहार कर पूरी जिन्दगी निकाल सकते हैं और यह भी हो सकता है आपको इस रोग से हमेशा के लिये भी छुटकारा दिला दे। आप लक्षणानुसार इन होम्योपैथिक औषधियों को अंग्रेजी औषधियाें के साथ भी व्यवहार कर सकते हैं। ब्रायोनिया, क्रेटाजियस ओक्स क्यु, रेस्क्यु, एग्रीमोनी, लोलीयम टी, एकोनाइट , बेराइटा आयोड (कोरोनोरी आर्टरी का ब्लॉकेज खोलने में समर्थ), इत्यादि अनेक होम्योपैथिक दवाएँ हैं जो आप योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक के अधीन रहकर लेकर आप लाभान्वित हो सकते हैं।
अगर आप हृदय रोग से बचना चाहते हैं तो रोज दिन में तीन बार स्ट्रोन्ट्रिया कार्ब 30 दिन लें, इससे ब्लड प्रेशर हमेशा के लिये ठीक होते देखा गया है और हृदय में रुकावट को साफ करने में कारगर है। अगर किसी को ब्लॉकेज है तो 3 से 4 माह में बिना ऑपरेशन अवरोध ठीक होते देखा गया है।
होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।

शेयर करें

मुख्य समाचार

हैदराबाद ने बेंगलुरु को 5 विकेट से हराया, सनराइजर्स छठवीं जीत के साथ टॉप-4 में पहुंची, बेंगलुरु दूसरे नंबर पर बरकरार

 शारजाह : आईपीएल के 52वें मैच में हैदराबाद ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 5 विकेट से हरा दिया। सनराइजर्स की सीजन में यह छठवीं जीत आगे पढ़ें »

विम्बलडन चैम्पियन हालेप काेरोना संक्रमित

वाशिंगटन : विम्बलडन चैम्पियन सिमोना हालेप ने बताया कि वह कोरोना वायरस जांच में पॉजिटिव आयी है और उनमें इस बीमारी के ‘हलके लक्षण’ है। आगे पढ़ें »

ऊपर