हर उम्र में चाहिए विटामिन्स और मिनरल्स

संतुलित आहार हर आयु में लेना आवश्यक है, तभी सेहत ठीक रह सकती है। संतुलित आहार में विटामिन्स व मिनरल्स का विशेष योगदान होता है। हम जब थकान, कमजोरी, सुस्ती महसूस करते हैं तो हम साधारणतया यह नहीं समझ पाते कि हम विटामिन्स और मिनरल्स ले रहे हैं या नहीं। ये सब लक्षण इनकी कमी से होते हैं। विटामिन्स शरीर की चयापचय प्रक्रिया को नियमित बनाते हैं। ए, बी, सी, डी, ई और के विटामिन्स हमें नियमित लेेने चाहिए। इनमें से विटामिन ए,डी,ई और के शरीर में संचित रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर इनका प्रयोग होता रहता है पर विटामिन्स बी और सी शरीर में एकत्रित नहीं होते। इनका प्रतिदिन सेवन जरूरी है। महिलाओं को हर आयु में इनकी आवश्यकता रहती है क्योंकि माहवारी, गर्भावस्था, शिशु का जन्म, मेनोपॉज जैसी प्रक्रियाओं से उन्हें गुजरना पड़ता है। अगर इस दौरान उन्हें पौष्टिक आहार नहीं मिलता तो शरीर में कई कमियां आनी शुरू हो जाती हैं और धीरे-धीरे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती जाती हैं। आइए देखें विटामिन्स, कैल्शियम, फॉलिक एसिड और ओमेगा 3 फैटी एसिड उम्र के साथ कितने महत्त्वपूर्ण हैं।
20 से 30 की उम्र में भी जरूरी हैं मिनरल्स और विटामिन्स
यह उम्र जीवन में सेटल होने की होती है क्योंकि काॅलेज या प्रोफेशनल पढ़ाई पूरी कर अपने क्षेत्र में जमना होता है। यह उम्र बहुत भाग दौड़ वाली होती है। इस उम्र में अक्सर भाग दौड़ में नाश्ता नहीं कर पाते। भूख लगने पर कुछ भी बाजारी रेडी टू ईंट खा लेते हैं। इनसे पेट तो भर जाता है पर शरीर को पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते, न फाइबर्स, न विटामिन्स और मिनरल्स आदि। इससे आगे जाकर कब्ज, पेट की समस्याएं, ब्लडप्रेशर आदि इस उम्र में हो सकता है।
कैल्शियम का सेवन
कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, हड्डियां कमजोर होने पर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। कैल्शियम की कमी से हृदय, मांसपेशियां और नर्वस सिस्टम भी सुचारु रूप से काम नहीं करता।
कभी कभी ऐसा होता है कि हम जो खाद्य पदार्थ लेते हैं, उनसे कैल्शियम पूरा नहीं मिल पाता। इस उम्र में हरी सब्जियां दूध, दही, छाछ का सेवन नियमित करें। जिन खाद्य पदार्थों में कैल्शियम हो, उन्हें नियमित खाएं। अगर हमारा शरीर खाद्य पदार्थों से मिलने वाले कैल्शियम को अवशोषित नहीं कर पाता तो डाॅक्टर से परामर्श कर उनके सप्लीमेंट लें। इस उम्र में 500 से 800 ग्राम कैल्शियम शरीर को चाहिए।
विटाामिन डी का सेवन
शरीर में विटामिन डी की कमी को प्रात: की धूप व दूध के नियमित सेवन से पूरी की जा सकती है। शरीर में कैल्शियम के अवशोषण हेतु विटाामिन डी की आवश्यकता पड़ती है। अगर विटामिन डी कम हो तो कैल्शियम शरीर को नहीं मिल पाता। विटामिन डी के सप्लीमेंटस डाक्टर के परामर्श अनुसार लें। प्रतिदिन 400 से 600 ग्राम विटामिन डी लें।
विटामिन सी का सेवन
विटामिन सी की कमी को खट्टे रसदार फलों के नियमित सेवन से पूरा किया जा सकता है। विटामिन सी की कमी होने पर शरीर में आयरन अवशोषित नहीं हो पाता। आज केे युवा वर्ग में विटामिन बी 6 और विटामिन बी-12 की कमी देखी जा रही है। विटामिन बी6 और 12 आप दूध, लो फैट दही के सेवन से पूरी कर सकते हैं।
फॉलिक एसिड
गर्भवती महिलाओं और गर्भ धारण करना चाहने वाली महिलाओं को फॉलिक एसिड का सेवन ज्यादा करना चाहिए, ताकि शिशु का जन्म स्वस्थ शिशु की तरह हो। फॉलिक एसिड के मिलए बींस, पत्तेदार हरी सब्जियां और संतरे नियमित लें। अगर जरूरत पड़े तो डाॅक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी ले सकते हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड हेतु रोजाना अखरोट का सेवन करें।
21 से 50 वर्ष की आयु में विटाामिन्स और मिनरल्स का योगदान जरूरी
कैल्शियम की आवश्यकता इस उम्र में थोड़ी बढ़नी शुरू हो जाती है क्योंकि बोन डेंसिटी धीरे धीरे कम होने लगती है। इससे आस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ने लगता है। महिलाओं को इस आयु के दौरान मेनोपॉज भी हो जाता है और उनके लिए कैलिशयम की जरूरत और बढ़ जाती है। प्रतिदिन 1000 ग्राम कैल्शियम इस उम्र में लेना चाहिए। विटामिन डी इस उम्र में ठीक तरह से शरीर में अवशोषित नहीं होता। डाॅक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें। जिन महिलाओं के पीरियड्स चल रहे हैं, उन्हें आयरन सप्लीमेंट डाक्टर की सलाह से लेने चाहिए और अपनी प्रतिदिन की डाइट में आयरन युक्त भोज्य पदार्थ नियमित लें। मेनोपॉज होने वाली महिलाओं को आयरन सप्लीमेंटस नहीं लेने चाहिए। अपने प्रतिदिन के आहार में खट्टे रसदार फल अवश्य लें ताकि विटामिन सी शरीर को मिलते रहें। गर्भंवती महिलाएं फालिक एसिड के सप्लीमेंट्स डाक्टर की सलाह पर लेती रहें। मेनोपॉज के बाद महिलाओं को ओमेगा 3 फैटी एसिड्स की आवश्यकता बढ़ जाती है क्योंकि उनका एस्ट्रोजन हार्मोन लेवल कम होने लगता है जिससे हृदय रोग का ,खतरा बढ़ जाता है। मछली के सेवन से और नियमित अखरोट गिरी खाने से इसकी पूर्ति कर सकते हैं।बढ़ती उम्र में विटामिन बी 6 और बी12 की कमी हो जाती है इसलिए सप्लीमेंट्स लेना जरूरी होता है पर डाॅक्टर का परामर्श लेकर ही सप्लीमेंट्स कितना और कब लें।
50 से ऊपर की आयु में
उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर पड़ने लगती हैं। उनकी मजबूती के लिए प्रतिदिन 1200 ग्राम कैल्शियम की आवश्यकता पड़ती है।विटामिन डी भी धीरे धीरे शरीर में अवशोषित नहीं हो पाता। महिलाओं को विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी दोनों लेने चाहिए।ओमेगा 3 फैटी एसिड्स की कमी को पूरा करने के लिए डाक्टर की सलाह से फिश ऑयल कैप्सूल्स का सेवन करें। विटामिन बी 6 और विटामिन बी 12 लाल रक्त कोशिकाओं और नर्व सेल्स की वृद्धि याददाश्त के लिए आवश्यक होता है। इसलिए उस उम्र में डाक्टर की सलाह से इनके सप्लीमेंट्स लेने चाहिए। आयरन युक्त मल्टी विटामिन डाक्टर की सलाह से लें क्योंकि इस आयु में आयरन की आवश्यकता अधिक नहीं होती। (स्वास्थ्य दर्पण) -सुनीता गाबा

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