वेनेजुएला में संकट गहराया, दाने-दाने को मोहताज लोग कर रहे लूटपाट व हत्याएं

काराकासः वेनेजुएला में दिनों-ब-दिनों स्थिति और बिगड़ गई है। यहां इतनी महंगाई बढ़ गई है कि दाने-दाने को मोहताज लोग अब शॉपिंग कॉम्पलेक्स सहित अन्य स्टोर से सामान लूटपाट करने व हत्याएं करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। यहां पांच दिन से ऊपर हो गए लेकिन बिजली गुल की समस्या बनी हुई है।
वेनेजुएला में जारी राजनीतिक संकट के बीच राष्ट्रपति निकोलस मादुरो देश की सत्ता पर पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। वहीं विपक्ष उनकी सत्ता को उखाड़ फेंकने पर आमादा है। इससे उत्पन्न हुए गतिरोध से देश में परिस्थितियां असामान्य रूप से खराब हुई हैं। जुआन गुएदो ने देश के आम नागरिकों से राष्ट्रपति मादुरो और उनकी सरकार के सभी लोगों से वेनेजुएला के आजाद होने तक विरोध जारी रखने का आह्वान किया है।
1600 जगहों पर लूटपाट
देश में मुद्रास्फीति की दर आसमान छू रही हैं। वहीं हालिया जारी ब्लैक आउट से राजधानी काराकस में 1600 जगहों पर लूटपाट की खबरें आ रही है। यह दक्षिण अमेरिकी देश आम तौर पर पेट्रोलियम के मामले में बहुत समृद्ध है। इस देश ने ह्यूगो शावेज के कार्यकाल में काफी तरक्की भी की है। लेकिन, देश में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के कारण हाल के वर्षों में 30 लाख से अधिक लोगों ने वेनेजुएला को छोड़ दिया है। बिजली कटौती, भोजन और दवा की कमी ने लोगों के विस्थापन को और ज्यादा बढ़ाया है।
2018 का चुनाव निष्पक्ष था
निकोलस मादुरो को पहली बार अप्रैल 2013 में अपने संरक्षक और पूर्ववर्ती राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की मृत्यु के बाद चुना गया था। उस समय उन्होंने मात्र 1.6 प्रतिशत वोटों के अंतर से विपक्षी प्रत्याशी पर जीत दर्ज की। उनके पहले कार्यकाल के दौरान वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई और कई लोगों ने उन्हें और उनकी समाजवादी सरकार को इस गिरावट के लिए दोषी ठहराया। विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद मादुरो को मई 2018 में विवादास्पद चुनावों में दूसरे छह साल के कार्यकाल के लिए फिर से चुना गया। इस चुनाव का अधिकांश विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था। इस चुनाव में कई विपक्षी उम्मीदवारों को न केवल चुनाव लड़ने से रोका गया जबकि, अन्य को जेल में डाल दिया गया। इनमें से कुछ तो कैद होने के डर से देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद विपक्षी दलों ने कहा था कि मादुरो के ऐसे व्यवहार से मतदान न तो स्वतंत्र होगा और न ही निष्पक्ष होगा। मादुरो के दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेते ही यह विवाद फिर से बढ़ गया। नेशनल असेंबली का तर्क है कि क्योंकि चुनाव निष्पक्ष नहीं था इसलिए मादुरो का शपथग्रहण बेकार है और देश का राष्ट्रपति पद खाली है।
सेना निभा सकती है अहम भूमिका
कहा जा रहा है कि इस संकट को वेनेजुएला की सेना खत्म कर सकती है। वहां की सुरक्षा बलों को इस संकट में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अब तक सेना मादुरो के प्रति वफादार रही है। इसके फलस्वरूप मादुरो ने सेना को लगातार वेतन वृद्धि के साथ पुरस्कृत किया।

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