मोदी-शाह का सीएए, एनआरसी और एनपीआर को अलग-अलग बताना सबसे बड़ा झूठ : भाकपा माले

दरभंगा : भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर विपक्ष के भ्रम फैलाने के भारतीय जनता पार्टी के आरोप पर पलटवार करते हुए इन्हें पसंद का मतदाता और नागरिक चुनने की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परियोजना बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का इन तीनों को अलग-अलग बताना सबसे बड़ा झूठ है।
सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ देश मे चल रहे आंदोलनों की प्रखर प्रवक्ता और भाकपा-माले पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि किसी भी लोकतंत्र में जनता सरकार को चुनती है लेकिन सीएए, एनपीआर और एनआरसी की आरएसएस की परियोजना सरकार को नागरिक चुनने की आजादी दे देगी। यह लोकतांत्रिक देश मे सम्भव नही है और यह पूरी तरह से तानाशाही परियोजना है। उन्होंने कहा कि मोदी और शाह झूठ बोल रहे हैं कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर तीनों अलग अलग हैं। यह सबसे बड़ा झूठ है। कविता कृष्णन ने हुए कहा कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर एकीकृत परियोजना है, जिसके जरिये मोदी सरकार अपनी पसंद का मतदाता और नागरिक चुनने का अधिकार हासिल करना चाहती है। जो व्यक्ति या परिवार मोदी सरकार के खांचे में फिट नहीं होगा उसे संदिग्ध नागरिकता की सूची में डाल दिया जाएगा। साथ ही निर्दयी और भ्रष्ट नौकरशाही को जनता की नागरिकता से खेलने का अधिकार मिल जाएगा। भाकपा-माले नेता ने कहा कि इस प्रक्रिया में खासकर दलित, गरीब और वंचित जमात के लोग प्रभावित होंगे। जिस तरह से उन्हें गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने वालों की सूची, राशन कार्ड सूची से बाहर रखा जाता है, उसी तरह उन्हें नागरिकता से भी बाहर रखा जाएगा और फिर उनसे न केवल गुलामों की तरह काम लिया जाएगा बल्कि नागरिक अधिकारों से वंचित किया जाएगा।कविता कृष्णन ने कहा कि एनपीआर पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि यही एनआरसी का प्राथमिक आधार डाटा बनेगा। उन्होंने मोदी और शाह को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें दम है तो नेताओं की बात छोड़िये, छात्र-छात्राओं के साथ सीधे संवाद करने की हिम्मत दिखाएं और उसका सीधा प्रसारण हो ताकि जनता वास्तविकता से रूबरू हो सके। भाकपा-माले नेता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पदस्थापित पुलिस उपाधीक्षक देविंदर सिंह की आतंकवादियों के साथ गिरफ्तारी के मामले की उच्चस्तरीय स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए क्योंकि यह आदमी जहां-जहां रहा है वहां आतंकी हमले हुए हैं। यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो पुलवामा आतंकी हमले का सच उजागर हो सकेगा क्योंकि उस समय वह पुलवामा में पदस्थापित था। उन्होंने कहा कि बर्बर दमन, गिरफ्तारी और मुकदमे के जरिये सरकार लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाना चाहती है, जो सफल नही होगा। जुल्म जितना बढ़ेगा, प्रतिरोध उतना ही प्रबल होगा।
इस मौके पर भाकपा-माले के मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा ने कहा कि बिहार में बढ़ता चौतरफा आंदोलन मांग कर रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनपीआर पर रोक लगाएं। केरल और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर बिहार भी इस पर रोक लगाए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जनभावना और बढ़ते जनांदोलन को ध्यान में रखकर कदम उठाएं अन्यथा कुर्सी छोड़ दें। इस अवसर पर राज्य स्थायी सामिति के सदस्य सह जिला सचिव बैद्यनाथ यादव भी उपस्थित थे।

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