भगवान कृष्‍ण का 5247वां जन्मोत्सव, जानें जन्‍माष्‍टमी का शुभ मुहूर्त और पूजाविधि

कोलकाता : हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत अधिक महत्व होता है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस दिन श्री लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना की जाती है। अधिकांश लोग इस दिन व्रत भी रखते है। आइए आपको बताते हैं इस बार जन्‍माष्‍टमी पर कब है पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजाविधि…
जन्माष्टमी पूजन मुहूर्त
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार इस बार कान्‍हाजी का 5247वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मान्‍यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का अवतरण 3228 ईसवी वर्ष पूर्व हुआ था। 3102 ईसवी वर्ष पूर्व उन्‍होंने मृत्‍यु लोक को छोड़ दिया था। इस बार भाद्र मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी का आरंभ रविवार को रात 11 बजकर 25 मिनट पर होगा और अष्‍टमी सोमवार, 30 अगस्‍त को रात 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। इसलिए उदया तिथि को मानते हुए जन्‍माष्‍टमी का व्रत 30 अगस्‍त को किया जाएगा। इस बार शैव और वैष्‍णव यानी गृहस्‍थ और साधु-संत दोनों एक ही दिन व्रत करेंगे।
जन्‍माष्‍टमी की पूजन विधि
चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाए।
भगवान् कृष्ण की मूर्ति चौकी पर एक पात्र पर रखिए।
घी का दीपक और धूपबत्ति जलाएं।
श्री कृष्ण को पंचामृत से और गंगाजल से स्नान कराएं।
अब श्री कृष्ण को वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार कीजिए।
अष्टगंध चन्दन या रोली का तिलक लगाएं और साथ ही अक्षत भी तिलक पर लगाएं।
माखन मिश्री और चूरमा अर्पण कीजिए और तुलसी का पत्ता विशेष रूप से अर्पण कीजिए।

 

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