बिहार स्वास्‍थ्य मंत्री का गैर-जिम्मेदाराना बयान, कहा म‌स्‍तिष्क बुखार से बच्चों की मौत उनकी नियति

मुजफ्फरपुरः बिहार में पिछले कई दिनों से व्यापक पैमाने पर फैली भयावह बीमारी एक्यूट इंकेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) ने कई मासूमों की जान ले ली है। पिछले 15 दिनों में 67 बच्चों ने इस बीमारी से जुझते हुए अपना दम तोड़ दिया है। बिहार स्वास्‍थ्य विभाग के मंत्री होने के नाते इसकी जिम्मेदारी लेने की बजाए मंत्री मंगल पांडेय ने बहुत ही गैर -जिम्मेदाराना बयान दिया है। उन्होंने इस बीमारी से हो रही बच्चों की मौत को उनकी नियति बताया है। उन्होंने कहा कि ”बच्चों की मौत के लिए न प्रशासन जिम्मेदार है और न ही सरकार। बच्चों की नियति ठीक नहीं थी। मौसम भी इसके लिए जिम्मेदार है। सरकार ने इलाज के लिए पूरे इंतजाम किए थे।” बताते चलें कि ‌इस बीमारी को बिहार की लोकल भाषा में ‘चमकी बुखार’ भी कहा जा रहा है।

अधिक तापमान से बढ़ता है खतरा

अबतक केजरीवाल और एसकेएमसीएच अस्पतालों में एक्यूट इंकेफेलाइटिस सिंड्रोम से ग्रसित कुल 288 बच्चों को भर्ती कराया गया। जिनमें 12 की हालत नाजुक बनीं हुई है और 105 का इलाज किया जा रहा है। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर साहनी ने कहा कि इस बीमारी पर क्ए गए शोध में सामने आया है कि तापमान और आर्द्रता का बढ़ना इसके खतरे को और बढ़ा देता है। पारा जब 40 डिग्री की लकीर पार कर ले और मौसम में नमी 70 से 80 प्रतिशत हो तब ये बीमारी विकराल रूप ले लेती है। बीमारी के लक्षणों के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें तेज बुखार के साथ झटके आते हैं। हाथ-पैर में ऐंठन होती है और कुछ ही देर में बच्चा बेहोश हो जाता है। उन्होंने कहा कि इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। रात में बिना कुछ खाए, खाली पेट सोने वाले बच्चों को ये बीमारी अपनी चपेट में ज्यादा जल्दी लेती है।

लीची से जुड़ी है बीमारी की जड़ें

स्वास्थ्य विभागद्वारा जारी की गई गाइडलाइन में बताया गया है कि अधिक मात्रा में लीची का सेवन करना और कड़ी धूप में खाली पेट बाहर निगलना इसका मुख्य कारण है। जानकारी के अनुसार लीची के बीज और फल में ऐसा रसायन होता है जो ब्लड शुगर के स्तर को अचानक कम कर देता है, जिससे यह बीमारी और प्रगढ़ हो जाती है। जिन बच्चों में इसके लक्षण पाये गए हैं वो सभी ज्यादातर 1 से 15 साल की उम्र के बीच के हैं। जिस क्षेत्र में लीची के बगान अधिक हैं वहां इस बिमारी ने अपना वर्चस्व अधिक स्‍थापित किया हुआ है।

बता दें कि सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है क‌ि राज्य में इस बीमारी द्वारा हो रहे बाल-संहार पर मुख्यमंत्री नितीश कुमार का कोई वक्तव्य अभी तक सामने नहीं आया है।

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