बिहार में होगी जाति आधारित जनगणना, दूसरी बार प्रस्ताव पास

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पटना : बिहार में 2021 की जनगणना जाति आधारित होगी। इसे लेकर गुरुवार को विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है। केंद्र सरकार से जात‌िगत आधार पर राज्य में अगले साल जनगणना कराने की मांग की गई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी समय से यह मांग कर रहे थे। इस मुद्दे पर विपक्षी दल भी एकमत रखते हैं। बता दें कि देश में 1931 के बाद जाति आधारित जनगणना नहीं हुई।

आरक्षण पर भी पड़ेगा जनगणना का प्रभाव
नीतीश के अनुसार, जाति आधारित जनगणना से सरकार को पिछड़े तबके के लिए विशेष योजनाएं बनाने में सहायता मिलेगी। इससे आरक्षण पर भी प्रभाव पड़ेगा। नीतीश का कहना है कि देश में आबादी को ध्यान में रखते हुए आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। पिछड़ी जातियों में भी किस जाति के लोगों की कितनी आबादी है, उनकी आर्थिक-सामाजिक दशा कैसी है, इसकी सही जानकारी होने से उनके लिए अलग योजना तय की जा सकती है। वर्तमान में पिछड़ी जातियों को 27% आरक्षण मिलता है। इससे पहले बिहार विधानसभा में 18 फरवरी 2019 को 2021 में जाति आधारित जनगणना कराए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

आबादी के अनुरूप मिले आरक्षण
नीतीश कुमार ने पिछले वर्ष जनवरी में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘सरकार को यह पता होना चाहिए कि किस जाति के लोगों की संख्या कितनी है। देश में आबादी के अनुरूप आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। इस देश में 1931 के बाद से जाति आधारित जनगणना नहीं हुई। जब भी जनगणना हुई है तो उसका आधार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और धर्म ही रहा है।’’

हर 10 वर्ष पर केंद्र सरकार कराती है जनगणना
उल्लेखनीय है कि हर 10 वर्ष पर केंद्र सरकार जनगणना कराती है। वर्तमान में जनगणना के प्रारूप से यह तो समझा जा सकता है कि इस देश की कितनी आबादी किस धर्म को मानती है और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या क्या है। लेकिन इस देश में सामान्य, पिछड़ा और अति पिछड़ी जाति के लोगों की संख्या कितनी है यह समझा नहीं जा सकता। इसकी जानकारी के लिए जाति आधारित जनगणना की मांग उठाई गई।

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